मेघालय राज्य में स्थित छोटा लेकिन प्रसिद्ध पर्यटन स्थल शिलांग जिसे पूर्वो उत्तर का स्कॉटलेंड भी कहते हैं, शिलांग चारों ओर से पर्वतों कि ऊँची ऊँची चोटियों से घिरा हुआ है, और लोगों कि आस्था है, कि इन ऊँची चोटियों कि पर्वत श्रंखलाओं में भगवान् विराजते है, शिलांग कुदरत की अदुत सुन्दरता समेटे हुए है. बादलों की छठा से घिरी शिलांग की वादियाँ एक शान्ति का अनुभव करवाती हैं, ये हिल स्टेशन इतना छोटा है, कि यहाँ पैदल घूम कर ही पूरा शहर घूमा जा सकता है. बारिश के मौसम में यहां मौजूद बहने वाले झरने, करीब 1695 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस जगह की खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं. अगर शिलांग के इतिहास की बात करें तो पता चलता है, कि ब्रिटिश शासन काल में इसका विकास हुआ. आजादी से पहले ब्रिटिश काल में असम के विभाजन से पूर्व शिलांग वहां की राजधानी था. असम के विभाजन के बाद जनवरी 1972 में शिलांग को मेघालय राज्य की राजधानी बना दिया गया. यहाँ बोली जाने वाली स्थानीय भाषाएँ  खासी (Khasi), हिंदी और अंग्रेज़ी है, शिलांग में खासी जनजाति के लोग रहते हैं जिनका पहनावा और रीत रिवाज भी यहाँ आने वाले  पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं. शिलांग किसी भी समय जाया जा सकता है पर सर्दी के मौसम में यहाँ आने वालों की बहुत भीड़ रहती है. पर बारिश के मौसम में थोड़ी बहुत परेशानी हो सकती है.

हवाई मार्ग (By Flight)- शिलांग का नजदीकी हवाई अड्डा शिलांग एयरपोर्ट (Shillong Airport) है जिसे उमराय एयरपोर्ट (Umrai Airport) भी कहते हैं. यह उमराय में स्थित है जो शिलांग शहर से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. यहां से पर्यटक शहर में घूमने के लिए बस व टैक्सी से जा सकते हैं.

रेल मार्ग (By Train)- शिलांग के सबसे पास गुवाहाटी रेलवे स्टेशन (Guwahati Railway Station) है जो शहर से करीब 104 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. रेलवे स्टेशन से बस, टैक्सी आदि की सुविधा से शिलांग तक पहुंचा जा सकता है. 

सड़क मार्ग (By Road)- मेघालय परिवहन निगम (Meghalaya Transport Corporation) और असम राज्य परिवहन निगम (Assam State Transport Corporation) की बसें गुवाहाटी से शिलांग के बीच चलती हैं. गुवाहाटी रेलवे स्टेशन (Guwahati railway station) के नजदीक ही मुख्य अंतरराज्यीय बस अड्डा है. जहां से पर्यटक बस लेकर शिलांग आसानी से पहुंच सकते हैं.

शिलांग के पर्यटन स्थल- पहाड़ों और हरे-भरे बगीचे के मध्य में घोड़े के नाल के आकर की वार्डस  झील जिसकी खासियत ये है, कि ये झील कुदरत का नमूना नहीं बल्कि मानव निर्मित है. इस झील को "पोलक की झील (Pollock’s Lake)" के नाम से भी जाना जाता है. झील के ऊपर एक लकड़ी का पुल बनाया गया है जहाँ से पर्यटक रंग-बिरंगी मछलियों को निहार सकते हैं. दरअसल मानव निर्मित इस झील के बारे में एक बड़ी रोचक कहानी है, कहा जाता है, कि  झील का निर्माण उस समय हुआ था जब असम के मुख्य आयुक्त विलियम वार्ड थे और उन्हीं के नाम पर इस झील का नाम "वार्डस" रखा गया. एक खासी कैदी ने जेल में अपने रुटीन के कामों से तंग आकर वार्डन से कुछ रचनात्मक करने का अनुरोध किया. जिसके बाद उसे इस खूबसूरत झील को बनाने की अनुमति दी गई. यह झील 1894 में बनकर तैयार हुई.

शिलांग में हाथी झरना (एलिफेंट फॉल “Elephant Falls”) शिलांग में स्थित एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है. इस झरने का पानी कई छोटे-छोटे पत्थरों से होकर गुजरता है. हरी-भरी झाड़ियों और पेड़ों से ढके हुए इस झरने को ‘का क्षेद लाई पातेंग खोहस्यू (Ka Kshaid Lai Pateng Khohsiew)’ भी कहते है जिसका अर्थ है "तीन चरणों में पानी का गिरना.

एक किलोमीटर से भी अधिक के क्षेत्रफल में फैला हुआ लेडी हैदरी पार्क (Lady Hydari Park) शिलांग के मुख्य पर्यटन स्थलों में से एक है. जिसमें एक छोटा-सा चिड़ियाघर भी है. इस चिड़ियाघर में पर्यटक पक्षियों की 73 प्रजातियां, सरीसृप और अन्य स्तनधारियों की 140 प्रजातियां देख सकते हैं. पार्क खास तौर पर विभिन्न रंगों वाली सुंदर गुलाब की क्यारियों के लिए जाना जाता है. इस पूरे पार्क को जापानी तकनीक पर विकसित किया गया है. इस पार्क में एक शानदार तितली संग्रहालय (Butterfly Museum) भी है जो बच्चों को बेहद पसंद आता है. पर्यटक इस पार्क में प्राकृतिक दृश्यों का आनंद उठाते हुए कुछ शांतिपूर्ण समय व्यतीत कर सकते हैं.

शिलांग में खाना पीना

किसी भी पर्यटन स्थल कि बात उसके खाने पीने की बात करे बिना पूरी नहीं होती. शिलांग के खाने-पीने में पारंपरिक और आधुनिक दोनों तरह का मेल दिखता है. यहां मांस से बने व्यंजन बेहद पसंद किए जाते हैं. जदोह (Jadoh) जो चावल और सूअर के मांस को मिलाकर बनता है, सूखी मछलियों से बनी डिश तुंगताब (Tungtab) और बिनस से बनी एक खास डिश तरुमबैय (Tarumbai) आदि यहां के लोग बड़े चाव से खाते हैं.


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