पटना. केंद्रीय कैबिनेट के निर्णय पर राज्य में अमल हुआ तो प्रदेश के साढे चार सौ से अधिक वीवीआइपी व वीआइपी  गाड़ियों से लाल-नीली बत्ती हट जायेगी. लाल और पीली बत्ती हटने वालों में सरकार के मंत्री, विधानमंडल के विभिन्न कमेटियों के सभापति और अनुमंडल से सचिवालय में बैठे आइएएस और आइपीएस अधिकारी भी शामिल हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की गाड़ियों पर पहले से ही लाल बत्ती नहीं जलती है. अब उपमुख्यमंत्री समेत सरकार के सभी मंत्रियों की गाड़ियों से लाल बत्ती हट जायेगी. मंत्रियों के अलावा बिहार विधानमंडल की 58 विभिन्न कमेटियों के सभापति की सरकारी गाड़ियों से भी लाल बत्ती उतर जायेगी.

इस फैसले के बाद बिहार के नेताओं की प्रतिक्रिया कुछ ऐसी रही. उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने मीडिया को बताया कि वह तो पहले ही लालबत्ती कल्चर के खिलाफ हैं. जनता की सेवा करना उनका अहम काम है, ना कि वीआईपी स्टेट्स दिखाना. सरकार में जिन मंत्रियों की गाड़ियों पर लाल बत्ती लगी है, उनमें उत्पाद मंत्री अब्दुल जलील मस्तान, वित्त मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी, उर्जा मंत्री विजेंद्र यादव, ग्रामीण विकास मंत्री शैलेश कुमार, जल संसाधन मंत्री ललन सिंह और शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी शामिल हैं. केंद्र के इस फैसले पर उर्जा मंत्री विजेंद्र यादव और ग्रामीण विकास मंत्री शैलेश साफ नाराज नजर आये. एक टीवी चैनल द्वारा किये गये सवाल के जवाब में विजेंद्र यादव ने कहा कि केंद्र सरकार का यह फैसला राज्य सरकारों पर बाध्य नहीं है. वहीं जल संसाधन मंत्री ललन सिंह सवाल से इतना नाराज हो गये कि सवाल का जवाब दिये बिना ही सचिवालय के अंदर चले गये.

सभी जिलों के जिला परिषद अध्यक्ष, जिलाधिकारी, उप विकास आयुक्त, अनुमंडलाधिकारी और यहां तक की एसपी की गाड़ियों से भी लाल व नीली बत्तियां उतर जायेंगी.  इसी प्रकार सरकार में विभिन्न विभागों के प्रधान सचिव व सचिव, अपर सचिव व एडीएम सहित 270 वाहनों में नीली बत्ती का इस्तेमाल होता है जो अब नहीं दिखेगी. पुलिस, एंबुलेंस व अग्निशमन जैसी इमरजेंसी गाड़ियों पर ही नीली बत्ती के इस्तेमाल की छुट होगी. केंद्रीय कैबिनेट के निर्णय पर राज्य सरकार को फैसला लेना है. समवर्ती सूची में परिवहन के शामिल होने से केंद्र के अलावा राज्य सरकार को निर्णय लेने का अधिकार है. अब बिहार सरकार  को इस मामले में निर्णय लेना है. परिवहन विभाग के अधिकारियों की माने तो केंद्र सरकार के निर्णय को देखा जायेगा. इसके आधार पर निर्णय लिया जायेगा.

सीएम की गाड़ी पर पहले से नहीं जलती लाल बत्ती- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की गाड़ियों पर लाल बत्ती नहीं जलती है. पिछले कई साल से उनके वाहनों में वीवीआइप बत्तियां नहीं जलायी जाती है. अब तो सीएम की काफिले में चलने वाली गाड़ियों से सायरन भी नहीं बजाया जाता. पिछले साल सरकार ने राज्यपाल और मुख्य न्यायाधीश की गाड़ियों को छोड़ सभी वीवीआइपी गाड़ियों से सायरन लगाने से मना कर दिया था.


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