कबाड़ हमारे रोजमर्रा के जीवन में बहुत बड़ा हिस्सा होते हैं. हम हर रोज किसी न किसी काम के बाद कुछ कबाड़ सामान निकालते रहते हैं. जैसे कि पूजाघर में धूप जलाने के बाद खाली हो चुका माचिस का डिब्बा, असाइनमेंट लिखने में खत्म हो चुकी पेन, किचन में नया डिन सेट लाने के बाद पुराने हो चुके बर्तन या फिर और भी बहुत कुछ. उन कबाड़ को या तो हम डस्टबिन में डाल देते हैं या फिर बेच देते हैं. कुछ को हम अपनी छत की गंदगी बढ़ाने के लिए रख देते हैं. हम कबाड़ को पूरी तरह बेकार और अनुपयोगी मानते हैं. लेकिन ज़रा सोचिए, इन्हीं सब कबाड़ से अगर कोई बेहद ही सुंदर-सी ज्वेलरी बना डाले और वो इतनी खूबसूरत हो कि न्यूयॉर्क फैशन वीक जैसे बड़े इवेंट में उसका इस्तेमाल हो और बड़ी-बड़ी मॉडल्स उन्हें पहनकर इतरायें. पढ़ने में ये बच्चों जैसी बात है, लेकिन है सच...

ये दिल्ली की आंचल सुखीजा की कहानी है. कुछ अलग करने की जिद में आंचल ने जेवरात को एक नए अवतार के रूप में पेश करने की ठानी. अब ठानी तो ऐसी कि कुछ दिन पहले हुए न्यूयॉर्क फैशन वीक में उनकी ज्वेलरी पर हर कोई फिदा हो बैठा. न्यूयॉर्क फैशन वीक में धमाल मचा चुकी आंचल सुखीजा की इन ज्वेलरी डिजाइन में कोई हीरे-मोती नहीं जड़े हैं और न ही कोई सोने-चांदी. बल्कि उन्होंने बर्तन धोने वाला जूना, एसी का फिल्टर, बिजली फिटिंग वाला पाइप, माचिस की डिब्बी जैसी चीजों को कभी वेस्ट नहीं होने दिया. ये सब कूड़ा-कबाड़ा लगने वाली चीजें अब गले का हार और कानों की आकर्षक बालियां बन रही हैं.

स्क्रब से ज्वेलरी,आंचल

आंचल की बनाई ज्वेलरी पर फिदा हैं सब

आंचल ने अपनी डिजाइनर दोस्त वैशाली एस को जब पहली बार स्टील के जूने से बनीं ज्वेलरी दिखाई तो उन्हें बेहद पसंद आई. फिर क्या था वैशाली की सलाह पर आंचल ने अपने इस ज्वेलरी के नये एक्सपेरिमेंट को न्यूयॉर्क फैशन वीक तक पहुंचा दिया. आंचल के मुताबिक,

'मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि फैशन के इतने बड़े प्लेटफार्म पर मुझे इस ज्वेलरी के लिए इतनी सराहना मिलेगी. हम सुंदरता और आकर्षण के पीछे भागते हैं, हम सोचते हैं कि अच्छा दिखने के लिए जब तक डायमंड, प्लेटिनम नहीं पहनेंगे, तब तक रैंप पर हम लोगों को आकर्षित नहीं कर पाएंगे. यही सोच ड्रेस को लेकर भी होती है. जबकि बात सिर्फ आत्मविश्वास और एक अच्छी सोच और बड़े सपनों की होती है.'

सपने देखो और उसे पूरा करो

आंचल बताती हैं कि 'हम जब तक सपने नहीं देखेंगे तब तक जिंदगी की शुरुआत नहीं होगी. सपने देखना बहुत जरूरी है. वो पूरे हो या नहीं, ये बाद की बात है लेकिन उनसे रेस जरूर लगाते रहिए. मुझे इस बात का कोई इलहाम नहीं था कि स्क्रब जैसी चीज को भी यदि एक सुंदर ज्वेलरी का रूप दे दिया गया तो लोग उसे कितना पसंद करने लगे. सिर्फ जूना ही नहीं मेरी हर ज्वेलरी में मेरे लिए यही चुनौती होती है कि मैं इस कूड़े-कबाड़ से क्या ऐसा बना सकूं. सोने-चांदी, हीरा-प्लेटिनम इन सबसे ज्वेलरी डिजाइन करना आसान है. लेकिन चैलेंज तो वहीं है जब आप कबाड़ को भी आकर्षक बना दो. ये वही कबाड़ है जिसे हम और आप कहीं भी फेंक देते हैं और पर्यावरण के लिए भी हानिकारक बनता है.' अपनी जिंदगी को एक रंगमंच की तरह मानने वाली आंचल का मानना है, कि हर मनुष्य अपनी जिंदगी का अभिनेता है क्योंकि उसे जीवन में बहुत सारे रोल अदा करने होते हैं.


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