खबरार्थ. जैसा कि पहले से लग रहा था... जनता दल यूनाइडेट के बागी सांसद शरद यादव को राज्यसभा से अयोग्य करार दिया गया है! शरद यादव कुछ-कुछ मामा बालेश्वर दयाल जैसे राजनेता हैं जो राजनीति तो अच्छी करते हैं लेकिन जरूरी कागजी रेकार्ड ठीक से नहीं रखते... संगठन के कानून-कायदों की परवाह नहीं करते, नतीजा... जहां सबूत के तौर पर प्रायोगिक हैसियत के बजाए सैद्धान्तिक कागज आगे बढ़ते हैं, वहां मात खा जाते हैं... वे जनसत्ता तो जीत जाते हैं, किन्तु राजसत्ता गंवा देते हैं! 

यही वजह है कि देश में समाजवादियों पर बिहार के सीएम नीतीश कुमार से ज्यादा मजबूत पकड़ रखनेवाले दिग्गज नेता शरद यादव के हाथ से सत्ता और संगठन, दोनों निकल गए! 

नीतीश कुमार के भाजपा से हाथ मिलाने के बाद से शरद यादव और अली अनवर, ये दोनों नेता नाराज चल रहे थे और बगावत कर दी थी. इसके बाद राज्यसभा में जदयू के नेता आरसीपी सिंह की याचिका दी थी जिस पर ये फैसला किया गया!

शरद यादव और अली अनवर, दोनों नेताओं ने बिहार के महागठबंधन टूटने के बाद गैरभाजपाइयों का साथ दिया था. शरद यादव को तो राज्यसभा में गत वर्ष ही चुना गया था और उनका कार्यकाल 2022 तक था, जबकि अली अनवर का कार्यकाल 2018 में खत्म होने वाला था. 

जदयू के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव के समक्ष अब दोहरी चुनौती है... नया संगठन खड़ा करना और सत्ता में वापसी!

शरद यादव की देश के समाजवादियों पर अच्छीखासी पकड़ है लिहाजा संगठन तो वे देर-सवेरे खड़ा कर लेंगे, लेकिन सत्ता पर कब्जा करने की राह आसान नहीं है क्योंकि बिहार में लालू उन्हें आगे नहीं आने देंगे और शेष क्षेत्रों में बगैर गठजोड़ के सत्ता हांसिल करना संभव नहीं है! वे गैरभाजपाई महागठबंधन का नेतृत्व कर सकते हैं?

राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश का संगम स्थल दिग्गज नेता मामा बालेश्वर दयाल का प्रभाव क्षेत्र रहा है जहां समाजवादियों की ताकत एक दर्जन से ज्यादा... विधानसभा, लोकसभा, नगरपालिकाओं, पंचायत समितियों आदि क्षेत्रों के चुनावी नतीजों को प्रभावित करने का दमखम रखती है! 

मामा बालेश्वर दयाल के प्रमुख अनुयायी शरद यादव से जुड़े हैं तथा शरद यादव भी इस क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहे हैं इसलिए शरद यादव के लिए इस क्षेत्र पर ध्यान देना सत्ता और संगठन, दोनों नजरियों से लाभदायक है!

शरद यादव समर्थित मूल राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय नेता और समाजसेवी डॉ. आरके मालोत कहते हैं कि क्षेत्र में वरिष्ठ जद नेताओ ने जमीन से जुड़े स्थानीय पार्टीजनों से चर्चा कर मामाजी के पदचिन्हों पर चलने वाले शरद यादव के साथ रहने की सहमति दी और इसी के अनुरूप यहां आगामी चुनावों को लेकर तैयारियां जारी हैं. डॉ. मालोत कहते हैं कि... उनका लक्ष्य जनता दल विचारधारा को क्षेत्र में स्थापित रखना व प्रतिष्ठित करना हैं और जन समर्थन के चलते अच्छी संम्भावनाएं भी हैं. डॉ. मालोत का मानना है कि... सही समय पर सही निर्णय आवश्यक है और मामाजी के इस क्षेत्र में उनके आदर्शो का अनुसरण कर रहे जन सेवकों को ही समर्थन मिलेगा यह तय है! 

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