नयी दिल्ली. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने देश के सबसे बड़े बैंक घोटाले को लेकर शनिवार को राजग सरकार पर करारा प्रहार किया तथा कहा कि इतना बड़ा घोटाला बिना शीर्ष स्तर के संरक्षण के नहीं हो सकता. उन्होंने प्रधानमंत्री की चुप्पी पर भी सवाल उठाया. कांग्रेस ने कहा कि वह संसद में अन्य दलों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करेगी तथा इस घोटाले की संयुक्त संसदीय समिति से जांच कराने की संयुक्त मांग करने के विकल्प खोजेगी. राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए इसकी अनदेखी करने का आरोप लगाया और उनसे यह बताने के लिए कहा कि इतना बड़ा घोटला क्यों और कैसे हुआ? संवाददाताओं द्वारा यह पूछने पर कि नीरव मोदी के साथ उनके भी संबंध होने के आरोप लगाये जा रहे हैं, कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यह सब इस मामले से ध्यान भटकाने की एक कोशिश है. पार्टी अध्यक्ष ने कांग्रेस संचालन समिति की बैठक के बाद आज यह बात संवाददाताओं से कही.

 संचालन समिति में यह तय किया गया कि भावी रणनीति तय करने के लिए पार्टी का महाधिवेशन दिल्ली में 16,17 और 18 मार्च को होगा. महाधिवेशन की तारीखों को पार्टी की संचालन समिति की आज हुई बैठक में मंजूरी दी गयी. कांग्रेस कार्यसमिति को भंग कर संचालन समिति का गठन किया गया है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने संचालन समिति की पहली बैठक की अध्यक्षता की. संचालन समिति की बैठक में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, वरिष्ठ नेता ए के एंटनी, अहमद पटेल, गुलाम नबी आजाद, मल्लिकार्जुन खड़गे आदि ने भाग लिया. 

राहुल ने कांग्रेस कार्यसमिति को भंग कर 34 सदस्यीय संचालन समिति का गठन किया है जो नयी सीडब्ल्यूसी का गठन होने तक उसके स्थान पर काम करेगी. राहुल ने बैठक के बाद बैंक घोटाले की चर्चा करते हुए संवाददाताओं से कहा, यह शुरूआत हुई आठ नवंबर (2016) को जब मोदीजी ने 500 और 1000 रुपये का नोट रद्द किया. उस समय उन्होंने पूरे देश का पैसा लोगों की जेब से निकाल कर बैंकिंग प्रणाली में डाल दिया. उन्होंने कहा, अब अजीब सी बात है कि नीरव मोदी 22 हजार करोड़ रुपये निकाल कर ले जाते हैं. प्रधानमंत्री शायद एक घंटा 45 मिनट परीक्षाएं लेना सिखाते हैं. किंतु मोदीजी यह नहीं बता सकते कि नीरव मोदी ने जो देश के 22 हजार करोड़ रुपये छीन लिए, उसके बारे में कौन जिम्मेदार है? कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, अलग-अलग मंत्री आ रहे हैं (स्पष्टीकरण देने) सामाजिक न्याय मंत्री, रक्षा मंत्री आये. किंतु प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री, जो इसके बारे में जिम्मेदार हैं, उन्होंने एक भी शब्द नहीं कहा.

उन्होंने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के हवाले से कहा कि 22 हजार करोड़ रुपये के स्तर का घोटाला, जो नीरव मोदी ने लिया है और प्रधानमंत्री मोदी जिसकी अनदेखी कर रहे हैं, इसको उच्च स्तर के संरक्षण के बिना किया ही नहीं जा सकता. 

उन्होंने कहा कि इस स्तर के घोटाले के बारे में सरकार के लोगों को मालूम होना ही चाहिए क्योंकि राशि इतनी बड़ी है. राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने देश की जेब से पैसा निकालकर बैंकों में डलवाया. उन्होंने एक प्रकार से जिम्मेदारी ली कि उनके पैसे की सुरक्षा की जाएगी और अब वही विफल हुए है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक शब्द नहीं कह रहे हैं. उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री को बाहर आकर कहना पड़ेगा, क्या हुआ, क्यों हुआ. उन्हें यह भी बताना होगा कि वह इस बारे में क्या कर रहे हैं? उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय को इसके बारे में जानकारी भी दी गयी थी. संचालन समिति की बैठक के बाद पार्टी के मीडिया विभाग के प्रभारी सुरजेवाला ने संवाददाताओं को बताया कि पार्टी का महाधिवेशन 16,17 और 18 मार्च को दिल्ली में होगा. उन्होंने कहा कि इसमें पार्टी के जिला एवं ब्लाॅक स्तर तक का प्रतिनिधित्व होगा. महाधिवेशन में राहुल के कांग्रेस अध्यक्ष पद पर निर्वाचन को अनुमोदित किया जाएगा.

एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि कांग्रेस के इतिहास में अभी तक मात्र पांच ऐसे मौके आये हैं जब सीडब्ल्यूसी के सदस्यों का निर्वाचन हुआ. सुरजेवाला ने बताया कि संचालन समिति की बैठक में राहुल गांधी ने एक नयी सोच और नयी दृष्टि की वकालत की. राहुल ने कहा कि कांग्रेस वरिष्ठ नेताओं के अनुभव तथा तरूणाई की शक्ति एवं उत्साह का एक सुंदर गुलदस्ता होगा. उन्होंने राहुल के हवाले से कहा कि कांग्रेस में इस बात को प्राथमिकता दी जाएगी कि महिलाओं, अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग आदि को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिले. 

राहुल ने बैठक में बेरोजगारी और कृषि क्षेत्र के संकट का उल्लेख करते हुए किसानों को उनकी लागत का पूरा दाम दिलवाने को देश की अनिवार्यता बताया. संचालन समिति की बैठक में एक प्रस्ताव को सर्वसम्मिति से पारित किया गया. इसमें कहा गया है, भारत के सबसे बड़े बैंक घोटाले ने पूरी बैंकिंग प्रणाली की नियमन व्यवस्था एवं धोखाधड़ी पकड़ने की क्षमता की समूची विफलता तथा भारतीय रिजर्व बैंक एवं वित्त मंत्रालय की निगरानी की विफलता को उजागर किया है. प्रस्ताव में कहा गया, दंड के भय के बिना जिस तरह से करोड़ों रुपये का सार्वजनिक धन लूटा गया और जिस तरह जोखिम प्रबंधन प्रणाली पूरी तरह से विफल हो गयी, वह स्वयं अपने में यह कहानी बयां करती है कि किस तरह पक्षपात किया गया और संरक्षण दिया गया. सत्य यह है कि बैंक घोटाले ने सांठगांठ वाले पूंजीवाद की संस्कृति को बेनकाब कर दिया, जो मोदी सरकार की निगाह में फूला-फला. प्रस्ताव में प्रधानमंत्री मोदी से मांग की गयी कि वह मूक दर्शक बने रहने के बजाय इस सबसे बड़े बैंक घोटाले के तथ्यों से अवगत करायें.

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