खबरंदाजी. पीएम नरेंद्र मोदी चीन के क्विंगदाओ शहर में एससीओ... शंघाई सहयोग संगठन के सम्मेलन में हिस्सा लेकर स्वदेश लौट आए हैं, अलबत्ता... चीनी सामान के बहिष्कार के स्वदेशी स्वर आजकल सुनाई नहीं दे रहे हैं, शायद हमें चीनी पटाखों का शोर पसंद नहीं है, इसलिए दीपावली के आसपास ही चीनी सामान के बहिष्कार के संकेतात्मक स्वर बुलंद होते हैं, शेष समय चीनी कारोबार शांति से चलता रहता है?

करीब डेढ़ महीने मेंं यह चीन का पीएम मोदी का दूसरा दौरा था. इससे पहले पीएम नरेंद्र मोदी की अप्रैल के आखिरी हफ्ते में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वुहान शहर में मेजबानी की थी! 

चीन के सामान के बहिष्कार के नारों के बीच हमने भी उन्हें झूला झुलाया था? कारण स्पष्ट है... देशभक्ति अपनी जगह, चीन-भारत व्यापार अपनी जगह! 

वैसे भी चीन के लिए भारत सबसे बड़ा बाजार है. भारत-चीन के शेष संबंधों का तो पता नहीं मगर आर्थिक संबंध चीनी की तरह मीठे हैं! 

खबरें हैं कि... चीन ने जहां भारत में 160 बिलियन डॉलर का निवेश किया है, वहीं भारत-चीन ने 2020 तक आपसी व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है? चीन के गैरजरूरी सामान के आयात और भारत के जरूरी सामान के निर्यात के बावजूद, 51 अरब डॉलर का व्यापारिक असंतुलन है, लेकिन चीन मेहरबान है... चीन ने भारत से अनाज, चीनी, अन्य कृषि उत्पादों के आयात को बढ़ावा देने का फैसला किया है? मतलब... चीन, भारतीय बाजार में आग लगाता रहेगा और भारत, चीन के पेट की आग बुझाता रहेगा!

समझना थोड़ा मुश्किल है कि स्वदेशी आंदोलन सही है या चीनी बाजार का भारत में विस्तार? शायद स्वदेशी स्वर इसलिए भी मौन हैं कि पूर्ण स्वदेशी केन्द्र सरकार, भारत-चीन व्यापार बढ़ाने के देशहित के प्रयास में लगी है? 

भारतीय बाजार में चीन के गिफ्ट आइटम इसलिए बहुत चलते हैं क्योंकि वे सस्ते हैं, बहुत सुंदर हैं! यह बात अलग है कि भारतीय उत्पादकों की यह बाजार लगातार कमर तोड़ रहा है? उलझन वाली बात यह है कि इतनी दूर चीन से आनेवाला सामान इतना सस्ता कैसे हो सकता है? और भारत में बनने वाला सामान महंगा कैसे है? या तो यह भारतीय अर्थ व्यवस्था को कमजोर करने का चीन का एक अभियान है या फिर केन्द्र सरकार अपने ही उत्पादकों पर विभिन्न कर आदि लाद कर बाजार से बाहर कर रही है!

भारत में विशाल पैमाने पर चीनी सामान का कारोबार होता है? समाचार संदर्भ है कि भारत ने चीन से 61 अरब डॉलर का साजोसामान आयात किया था, जबकि भारत ने चीन को केवल नौ अरब डॉलर का निर्यात किया था? भारत में आयात किए जाने वाले सामान में गिफ्ट आइटम्स, टीवी, कम्प्यूटर के सामान, फोन आदि हैं, मतलब... गैरजरूरी सामान! मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो वर्ष 2011 में भारत में विदेशी निवेश करने वाले देशों में चीन का स्थान 35वां था जो 2014 में 28वां हो गया तो वर्ष 2016 मे चीन, भारत में निवेश करने वाला 17वां देश हो गया? बहुत जल्दी भारत, चीन को टॉप टेन में झूला झुलाएगा!

यह सबकुछ तो ऊपरी है, भारत में चीन की व्यापारिक जड़े कितनी गहरी होती जा रही हैं यह तो देश-प्रदेश में बढ़ते चीनी कंपनियों के कारोबार को देखने से ही पता चल पाएगा, लेकिन... चोर को कहो- चोरी करो और साहुकार को कहो- जागते रहो? की नीति स्वदेशी आंदोलन की जरूर कमर तोड़ देगी!

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