इनदिनों. जदयू सदस्य हरिवंश नारायण सिंह राज्यसभा में उपसभापति चुने लिए गए. हरिवंश ने विपक्ष के उम्मीदवार बीके हरिप्रसाद को 20 वोटों से हराया. हरिवंश को 125 जबकि हरिप्रसाद को 105 वोट मिले. वैसे इस चुनाव में भाजपा कुछ खास मजबूत स्थिति में नहीं थी, लिहाजा... कांग्रेस नेता आनंद शर्मा के शब्दों में- अगर बीजेपी ने पास पर्याप्त संख्या होती तो वह अपना उम्मीदवार उतारती, ना कि किसी अन्य दल के नेता को चेहरा बनाती! खैर, इस चुनाव से कांग्रेस को प्रत्यक्ष नुकसान और अप्रत्यक्ष फायदा हुआ है?

जहां तीसरे मोर्चे की हवा निकल गई, वहीं आप की विपक्षी महागठबंधन में सम्मानजनक एंट्री रूक गई! इस चुनाव में टीआरएस, बीजेडी जैसे क्षेत्रीय दलों ने जिस तरह से एनडीए का साथ दिया उसने तीसरे मोर्चे की मजबूत समीकरण बनाने में लगी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है? उधर, लंबे समय से कांग्रेस की बेरूखी के कारण गैरभाजपाई मोर्चे से दूर खड़ी आप के लिए विपक्षी मंच पर सम्मानजनक एंट्री का बेहतर मौका था और इसीलिए आप ने पहल की थी कि राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल से सहयोग मांगे? लेकिन, कांग्रेस ने ऐसा नहीं किया, कारण?

लगातार कमजोर पड़ती जा रही आप से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का सहयोग के लिए अनुरोध, आप के लिए विपक्षी मंच पर आप के सम्मानजनक निमंत्रण का स्थाई और सशक्त आधार बन जाता! और इसीलिए, आम आदमी पार्टी ने चुनाव के बहिष्कार का फैसला लिया? खबर है कि... आप के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह का कहना था कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एनडीए गठबंधन के उम्मीदवार हरिवंश का समर्थन करने के बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अनुरोध को ठुकरा दिया था.

केजरीवाल ने ऐसा इसलिए किया था, क्योंकि उन्हें बीजेपी का समर्थन मिला था. सिंह का कहना था कि चूंकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने विपक्ष के उम्मीदवार के लिए अरविंद केजरीवाल से समर्थन नहीं मांगा, ऐसे में केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी के पास- चुनाव का बहिष्कार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा! खबर है कि राहुल गांधी द्वारा केजरीवाल से समर्थन मांगने की शर्त पर दिल्ली प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता शर्मिष्ठा मुखर्जी का कहना था कि... राहुल गांधी को ऐसे व्यक्ति से समर्थन मांगने की क्या जरूरत? जिसने अपनी मांग पूरी करने की शर्त पर 2019 में मोदी का समर्थन करने और चुनाव प्रचार करने की पहल की हो!

उल्लेखनीय है कि केजरीवाल ने कुछ समय पहले कहा था कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग पूरी होने पर वे अगले लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समर्थन में प्रचार करेंगे? मुखर्जी ने ट्वीट कर कहा... आप कहती है कि राजनीति में अहंकार नहीं चलता है? यह बात बिल्कुल सही है और यही वजह है कि केजरीवाल ने भाजपा को समर्थन देने के लिए राज्यसभा में मतदान से खुद को दूर रखा! ऐसा नहीं है कि कांग्रेस ने आप से समर्थन नहीं मांगा था, प्रेस रिपोटर््स की माने तो... अरविन्द केजरीवाल के सलाहकार नागेन्द्र शर्मा का कहना था कि कांग्रेस के तीन वरिष्ठ नेताओं ने आप के एक वरिष्ठ नेता को गुपचुप तरीके से फोन कर समर्थन मांगा था?

बहरहाल, सत्ताई जोड़तोड़ में इस वक्त भाजपा, कांग्रेस पर भारी है, लिहाजा... कांग्रेस हरसंभव कोशिश कर लेती तब भी उसके उम्मीदवार की हार तय थी? बस, चुनाव के बहाने कांग्रेस को पक्ष-विपक्ष के सियासी रूख को समझने का अवसर मिल गया, और इसीलिए... कांग्रेस की सियासी सेहत के लिए यह हार अच्छी है!

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