इस वर्ष भगवान की पूजा का 10 दिनी उत्सव 12 सितम्बर से प्रारम्भ हो रहा है,लेकिन हमेशा की तरह इस बार भी एक तिथि के दो बार आने से जनमानस मॆ संशय का निर्माण हो रहा है,कई पंचांगो के अनुसार गणेश चतुर्थी का पर्व 13 सितम्बर को है,जबकि चतुर्थी तिथि 12 सितम्बर को शाम 4:07 मिनिट से प्रारम्भ हो जायेगी तथा 13 सितम्बर को दोपहर 2:52 मिनिट मॆ समाप्त हो जायेगी,धर्मसिंधु तिथि निर्णय मान्यता के अनुसार चला जाय तो इस वर्ष गणेश चतुर्थी का पर्व 13 सितम्बर को मनाया जाना चाहिये लेकिन इस दिन यह समस्या आती है की चतुर्थी तिथि दोपहर 2:51 को समाप्त हो जायेगी.

*हमारे मतानुसार*-चतुर्थी तिथि 12 सितम्बर को शाम 4 बजकर 07मिनिट से चतुर्थी प्रारम्भ हो जायगी जो 13 सितम्बर को दोपहर 2:51 मिनिट तक रहेगी इस समयावधि मॆ आप भगवान गणेश की मूर्ती की स्थापना कर सकते है,इस चतुर्थी को चंद्र दर्शन करना निषेध रहता है 12 सितम्बर की रात्रि मॆ भाद्रपद मास  की चतुर्थी रहेगी इस रात्रि को चंद्रदर्शन न करें,13 सितम्बर की रात्रि को पंचमी तिथि रहेगी लेकिन धर्मसिंधु के अनुसार इस रात्रि को भी चंद्र दर्शन निषेध माना गया है,लेकिन हमारे मतानूसार 12 सितम्बर की रात्रि को चंद्रदर्शन न करें

*मध्याह्न गणेश पूजा का समय = 11:09 से 13:35

अवधि = 2 घण्टे 26 मिनट्स

12  को, चन्द्रमा को नहीं देखने का समय = 16:07 से 20:42

अवधि =4 घण्टे 35 मिनट्स

13 th को, चन्द्रमा को न हीं देखने का समय = 09:33 से 21:23

अवधि = 11 घण्टे 50 मिनट्स

चतुर्थी तिथि प्रारम्भ = 12/सितम्बर/2018 को 16:07 बजे

चतुर्थी तिथि समाप्त = 13/सितम्बर/2018को 14:51 बजे

*2018 गणेश चतुर्थी*

भगवान गणेश के जन्म दिन के उत्सव को गणेश चतुर्थी के रूप में जाना जाता है. गणेश चतुर्थी के दिन, भगवान गणेश को बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के देवता के रूप में पूजा जाता है. यह मान्यता है कि भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष के दौरान भगवान गणेश का जन्म हुआ था. अंग्रेजी कैलेण्डर के अनुसार गणेश चतुर्थी का दिन अगस्त अथवा सितम्बर के महीने में आता है.

गणेशोत्सव अर्थात गणेश चतुर्थी का उत्सव, 10 दिन के बाद, अनन्त चतुर्दशी के दिन समाप्त होता है और यह दिन गणेश विसर्जन के नाम से जाना जाता है. अनन्त चतुर्दशी के दिन श्रद्धालु-जन बड़े ही धूम-धाम के साथ सड़क पर जुलूस निकालते हुए भगवान गणेश की प्रतिमा का सरोवर, झील, नदी इत्यादि में विसर्जन करते हैं.

*गणपति स्थापना और गणपति पूजा मुहूर्त*

ऐसा माना जाता है कि भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल (12से 2 के बीच का समय) दौरान हुआ था इसीलिए मध्याह्न के समय को गणेश पूजा के लिये ज्यादा उपयुक्त माना जाता है. हिन्दु दिन के विभाजन के अनुसार मध्याह्न काल, अंग्रेजी समय के अनुसार दोपहर के तुल्य होता है,चूंकि इस बार यह समय 13 सितम्बर को आ रहा है इसिलिए गणपति स्थापना इस दिन दोपहर को ही करें.

हिन्दु समय गणना के आधार पर, सूर्योदय और सूर्यास्त के मध्य के समय को पाँच बराबर भागों में विभाजित किया जाता है. इन पाँच भागों को क्रमशः प्रातःकाल, सङ्गव, मध्याह्न, अपराह्न और सायंकाल के नाम से जाना जाता है. गणेश चतुर्थी के दिन, गणेश स्थापना और गणेश पूजा, मध्याह्न के दौरान की जानी चाहिये. वैदिक ज्योतिष के अनुसार मध्याह्न के समय को गणेश पूजा के लिये सबसे उपयुक्त समय माना जाता है.

मध्याह्न मुहूर्त में, भक्त-लोग पूरे विधि-विधान से गणेश पूजा करते हैं जिसे षोडशोपचार गणपति पूजा के नाम से जाना जाता है.

*गणेश चतुर्थी पर निषिद्ध चन्द्र-दर्शन*

गणेश चतुर्थी के दिन चन्द्र-दर्शन वर्ज्य होता है. ऐसा माना जाता है कि इस दिन चन्द्र के दर्शन करने से मिथ्या दोष अथवा मिथ्या कलंक लगता है जिसकी वजह से दर्शनार्थी को चोरी का झूठा आरोप सहना पड़ता है.

पौराणिक गाथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण पर स्यमन्तक नाम की कीमती मणि चोरी करने का झूठा आरोप लगा था. झूठे आरोप में लिप्त भगवान कृष्ण की स्थिति देख के, नारद ऋषि ने उन्हें बताया कि भगवान कृष्ण ने भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन चन्द्रमा को देखा था जिसकी वजह से उन्हें मिथ्या दोष का श्राप लगा है.

नारद ऋषि ने भगवान कृष्ण को आगे बतलाते हुए कहा कि भगवान गणेश ने चन्द्र देव को श्राप दिया था कि जो व्यक्ति भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दौरान चन्द्र के दर्शन करेगा वह मिथ्या दोष से अभिशापित हो जायेगा और समाज में चोरी के झूठे आरोप से कलंकित हो जायेगा. नारद ऋषि के परामर्श पर भगवान कृष्ण ने मिथ्या दोष से मुक्ति के लिये गणेश चतुर्थी के व्रत को किया और मिथ्या दोष से मुक्त हो गये.

*मिथ्या दोष निवारण मन्त्र*

चतुर्थी तिथि के प्रारम्भ और अन्त समय के आधार पर चन्द्र-दर्शन लगातार दो दिनों के लिये वर्जित हो सकता है. धर्मसिन्धु के नियमों के अनुसार सम्पूर्ण चतुर्थी तिथि के दौरान चन्द्र दर्शन निषेध होता है और इसी नियम के अनुसार, चतुर्थी तिथि के चन्द्रास्त के पूर्व समाप्त होने के बाद भी, चतुर्थी तिथि में उदय हुए चन्द्रमा के दर्शन चन्द्रास्त तक वर्ज्य होते हैं.

अगर भूल से गणेश चतुर्थी के दिन चन्द्रमा के दर्शन हो जायें तो मिथ्या दोष से बचाव के लिये निम्नलिखित मन्त्र का जाप करना चाहिये -

सिंहः प्रसेनमवधीत्सिंहो जाम्बवता हतः. 

सुकुमारक मारोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः॥

*प चंद्रशेखर नेमा"हिमांशु"*

9893280184,7000460931

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


खबर : चर्चा में


1. माना की पीएम मोदी बहादुर हैं, पर प्रेस से क्यों दूर हैं?

2. कैशलेस पर भरोसा नहीं? लोगों के हाथ में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा कैश

3. अमरनाथ यात्रा के लिए जम्मू-कश्मीर सरकार ने मांगे 22 हजार अतिरिक्त जवान

4. कीनिया को रौंदकर भारत ने हीरो इंटर कांटिनेंटल फुटबॉल कप जीता

5. SCO समिट- भारत समेत कई देशों के बीच महत्वपूर्ण एग्रीमेंट, PM मोदी ने दिया सुरक्षा मंत्र

6. ट्रंप से मुलाकात के लिए उत्तर कोरिया से चाइना होते हुए सिंगापुर पहुंचे किम जोंग

7. उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने यूजीसी बड़े बदलाव की तैयारी में

8. सुपर 30 का दबदबा कायम आईआईटी प्रवेश परीक्षा में 26 छात्र सफल

9. रेलवे बोर्ड चेयरमैन अश्विनी लोहानी, भोपाल से लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे.?

10. क्या आप भी पूजा-पाठ करने के लिए स्टील के लोटे का करते हैं इस्तेमाल?पहले जान लें ये बात

11. काम में मन नहीं लगता तो यह करें उपाय

************************************************************************************




Disclaimer : इस न्यूज़ पोर्टल को बेहतर बनाने में सहायता करें और किसी खबर या अंश मे कोई गलती हो या सूचना / तथ्य में कोई कमी हो अथवा कोई कॉपीराइट आपत्ति हो तो वह info@palpalindia.com पर सूचित करें। साथ ही साथ पूरी जानकारी तथ्य के साथ दें। जिससे आलेख को सही किया जा सके या हटाया जा सके ।