नेक काम करने की कोई उम्र नहीं होती है. इसी सोच के साथ  पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित स्वतंत्रता सेनानी सुधांशु बिस्वास 99 साल की उम्र में भी समाजसेवा में जुटे हुए हैं. भारत का कल मजबूत बनाने के लिए वह एक नहीं बल्कि 18 स्कूल चला रहे हैं. 

स्कूल में पढ़ने आने वाले हर बच्चे को वह नि:शुल्क शिक्षा के साथ खाना भी देते हैं. वह समाज की बेहतरी के लिए वर्षों से कार्य कर रहे हैं. उन्होंने कभी भी मीडिया या फिर अन्य तरीके से सामने आकर अपनी इस सफलता की चर्चा नहीं की. वह हमारे देश के सच्चे हीरो हैं. समाज के प्रति उनके इस दृढ़निश्चय को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 2018 में समाजसेवा के लिए पद्मश्री अवॉर्ड दिया है. 

स्वामी विवेकानंद जी के जीवन से प्रभावित सुधांशु विश्वास ने 1948 में पूरी तरह से गृहत्याग दिया था. 1917 को अविभाजित बंगाल में जन्में सुधांशु विस्वास बचपन से ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे. जब वह सातवीं कक्षा में थे, तो पहली बार मुलाकात स्वतंत्रता सेनानी नृपेन चक्रवर्ती से हो गई. सुधांशु उनके साथ जुड़ गए. कोलकाता के अलबर्ट हॉल में जब स्वतंत्रता सेनानियों पर ब्रिटिश पुलिस के नृशंस अत्याचार हो रहे थे, तब बिस्वास वहां से भाग निकले. 1939 में मैट्रिक की परीक्षा दे रहे थे, तभी परीक्षा हॉल से उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. हालांकि बाद में उन्हें परीक्षा देने की अनुमति दी गई, लेकिन तभी से बच्चों की निर्बाध शिक्षा का बीज मन में घर कर गया था. 1942 में वे अनुशीलन समिति के सदस्य बने.

1948 में वह घर छोड़कर हिमालय में साधुओं के साथ रहने लगे. वहां पर उन्होंने 14 साल तक कठिन साधना की. इसके बाद वह 1961 में दुनिया के सामने फिर से आ गए. वह ऑल इंडिया प्लास्टिक एसोसिएशन से जुड़े और संसद के समक्ष भूख हड़ताल पर बैठे. 1962 में उन्होंने कुछ कारोबार किया, ताकि कुछ पैसा जुटाकर समाज के काम में लगा सके. उन्होंने गरीब बच्चों को मुफ़्त शिक्षा देने का निर्णय किया.

श्री विश्वास ने 1971 में दक्षिण 24 परगना में होट्टर में दो आश्रम की स्थापना की. इसके बाद उन्होंने 1973 में उन्होंने बरुईपुर के पास श्री रामकृष्ण सेवाश्रम की स्थापना की. उन्होंने 1973 में रामकृष्ण सेवाश्रम की शुरुआत की और पश्चिम बंगाल के सुंदरबन क्षेत्र में 18 प्राइमरी स्कूल भी खोले. उनकी ओर स्थापित किए गए सभी स्कूल पश्चिम बंगाल के सुदूर ग्रामों में थे. उन्होंने रामकृष्ण सेवाश्रम नाम से खोले गए सभी स्कूलों में बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जाने लगी.

यहां पढ़ने वाले बच्चों की बदली जिंदगी

रामकृष्णपुर के इस अनौपचारिक स्कूल ने मूलभूत सुविधाओं से वंचित बच्चों और अनाथों के जीवन को बदल दिया है. स्वयं गणित शिक्षक होने के कारण सुंधाशु बच्चों को बेहतर तरीके से पढ‍़ाते हैं. प्रतिदिन सुबह यहां पर विवेकानंद जी के आदर्शों के साथ पढ़ाई शुरू होती है. इन स्थापित स्कूलों में किसी भी प्रकार की सरकार मदद नहीं ली जाती है. 

इन स्कूलों की सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें पढ़ने वाले कुछ बच्चे आज आराम से अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं और उन में कुछ अध्यापक, डॉक्टर और इंजीनियर बनकर देश की सेवा कर रहे हैं. बिस्वास ने इस मिशन को यहीं पर रुकने नहीं दिया, उन्होंने पास के गावों के कुछ वृद्ध लोगों को आश्रय भी दिया. वह वृद्धों के लिए आश्रम चलाते हैं. उन्होंने एक चैरिटेबल डिस्पेंसरी चलाने के बारे में सोचा और आम दवाईयां और होम्योपैथिक की दवाईयों को इकठ्ठा करके मरीजों को मुफ़्त में वितरित करने लगे. 

साभार: India Wave.in 

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


खबर : चर्चा में


1. RBI के खिलाफ आजादी के बाद पहली बार सरकार ने किया विशेष शक्ति का इस्तेमाल

2. CM योगी का राम मंदिर पर बड़ा बयान- धैर्य रखें, दिवाली पर खुशखबरी दूंगा

3. मध्यप्रदेश स्थापना दिवस विशेष...देखें हैं रंग हजार

4. न्यूनतम वेतन पर 'आप' की जीत, दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर SC ने लगाई रोक

5. सार्वजनिक वाहनों में अब जरूरी होगा लोकेशन ट्रेकिंग एवं आपात बटन

6. 50 पैसे का ये दुर्लभ सिक्का आपको दिला सकता है 51 हजार 500 रुपए, जानें कैसे

7. ईज ऑफ डुइंग बिजनेस: भारत 23 पायदान की छलांग लगा 100 से पहुंचा 77 वें स्थान पर

8. दिवाली पर घर जाने के लिए ऐसे कराएं कन्फर्म तत्काल टिकट

9. MeToo:HC ने खारिज की छानबीन के लिए निर्देश की मांग वाली याचिका

10. भारत में आर्थिक वृद्धि सुनिश्चित करने एक दशक में 10 करोड़ नए रोजगार की जरूरत

11. मंगलनाथ की भात पूजा सहित इन उपायों से कर्ज संकट कम होता

************************************************************************************




Disclaimer : इस न्यूज़ पोर्टल को बेहतर बनाने में सहायता करें और किसी खबर या अंश मे कोई गलती हो या सूचना / तथ्य में कोई कमी हो अथवा कोई कॉपीराइट आपत्ति हो तो वह info@palpalindia.com पर सूचित करें। साथ ही साथ पूरी जानकारी तथ्य के साथ दें। जिससे आलेख को सही किया जा सके या हटाया जा सके ।