नई दिल्ली. 20वें भारत रंग महोत्सव में युवा फोरम ने आज निम्नलिखित तीन नाटक (प्‍ले) प्रस्तुत किए:

एक्सक्यूज मी- आप कौन: नोएडा के एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ बॉयोटेक्‍नोलॉजी के ड्रामेटिक्स सोसाइटी मंथन द्वारा प्रस्‍तुत नुक्कड़-नाटक, हमारे रोजमर्रा के जीवन में होने वाले व्‍यक्तिगत अंतराल और निजता पर हो रहे आक्रमण की समस्या की पड़ताल करता है, मेट्रो में कार्यालय, या यहां तक कि सांस्कृतिक अनुष्ठान या सभी प्रकार के संबंधों में इसे देखने की कोशिश करता है. सभी सामाजिक कमियां और बुराइयां, चाहे वे छोटी या बड़ी हों, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी न किसी तरह व्यक्तिगत जीवन से जुड़ी होती हैं.

नाटक के माध्यम से उन्होंने सामाजिक बुराइयों और अपराधों जैसे भीड़ द्वारा किया गया अपराध, भेदभाव करना, साइबर सुरक्षा के खतरों और हो रहे अंधाधुंध अपराधों आदि को दिखाने की कोशिश की गई. लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और महाराजा अग्रसेन प्रौद्योगिकी संस्थान की नुक्कड़-नाटक टीम ने भी राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के परिसर में अपने नाटकों का प्रदर्शन किया. माहौल या परिवेश के अनुकूल हो रहा अभिनय भारत रंग महोत्सव की एक विशेषता है और यह थिएटर के महोत्‍सव में विभिन्‍न रंगों को जोड़ता है. इन प्रदर्शनों में विभिन्‍न राज्यों के कम-ज्ञात (जो लोकप्रिय नहीं है) स्थानीय, पारंपरिक और लोक कलाओं का वर्णन होता है जो इसे राष्‍ट्रीय राजधानी से जोड़ता है. नाटक के शुरू होने से पहले इन नाटकों का प्रदर्शन एनएसडी परिसर के ऑडिटोरियम में होता है.

आज के सशक्त प्रदर्शनों में कर्मा नृत्‍य, मंजीरा नृत्‍य और भवाई नृत्‍य का प्रदर्शन हुआ. डॉयरेक्‍टर्स मीट निर्देशक श्री थवाई थियाम (दी डंब वेटर) और श्री बापी बोस (मॉर्फोसिस) ने इस सत्र का संचालन किया. रंगमंच के आलोचक श्री शिवकेश मिश्रा और सुश्री अम्बा सान्याल ने भी इस सत्र में भाग लिया और निर्देशकों के साथ एक दिलचस्प सवाल-जवाब सत्र की शुरुआत की, उनकी कहानी के बारे में पूछा और ये भी पूछा कि उन्होंने इसे अपनाने के बारे में कैसे सोचा.

नाटक

हिगिता- अ गोली'ज ऐंग्‍जाइटी एट दी पेनाल्‍टी किक: शशिधरन नादुविल द्वारा मलयालम नाटक, एन. माधवन (हिगिता) और दूसरे पीटर हैंडके (दी गोली'ज ऐंग्‍जाइटी एट दी पेनाल्‍टी किक) द्वारा दो प्रसिद्ध कार्यों का एक स्वतंत्र नाटक है. हिगिता का मंचन 20 साल पहले पहली बार 30 मिनट के लघु नाटक के रूप में किया गया था. मंच की व्यवस्था में एक चर्च के साथ एक फुटबॉल मैदान है. फादर गीवरगीज दिल्ली के दक्षिणी हिस्से के पास एक छोटे शहर के चर्च के पादरी हैं. उन्‍होंने एक एक बार फादर कैप्रीटी, उनके इटली के मित्र से 'दी गोली'ज ऐंग्‍जाइटी एट दी पेनाल्‍टी बॉक्‍स' की कहानी सुनी थी.

(ओपन लॉन, 6:00 बजे शाम)

मैकबेथ: इसराफिल शाहीन का बंगाली नाटक, एक सैन्य शिविर में शुरू होता है, जहां स्कॉटिश किंग डंकन ने यह खबर सुनी कि उनके सेनापतियों मैकबेथ और बंको ने दो अलग-अलग हमलावर सेनाओं को हराया है, एक आयरलैंड से है जो विद्रोही मैकडोनाल्ड के नेतृत्व में था और दूसरा नॉर्वे से था. मैकबेथ राजा डंकन के लिए एक बहादुर और वफादार सेनापति है. भविष्यवाणी के बाद कि वह खुद राजा बन जाएगा, मैकबेथ महत्वाकांक्षी और लालची हो गया है. भविष्यवाणी और अपनी पत्नी के प्रोत्साहन के कारण, उसने राजा डंकन को मार दिया और सिंहासन पर कब्‍जा कर लिया. बाद में, मैकबेथ के अपराध, भय और मोह ने उसे अपनी शक्ति को सुरक्षित करने के लिए और भी हत्याएं करने के लिए प्रेरित किया.

भविष्यवाणियों में उनका विश्वास अंततः उनके पतन की ओर ले जाता है और उन्हें उखाड़ फेंका जाता है और उन लोगों द्वारा मार दिया जाता है, जिनके साथ उन्‍होंने अन्याय किया था. (श्री राम सेंटर, 4:00 बजे शाम)

अश्‍वत्‍थामन: जगदीश आर द्वारा रचित यह नाटक कन्नड़ का पहला काव्य नाटक है. इस नाटक में, महाभारत के एक अमर नायक अश्वत्थामा को उसके दुखद अंत को पूरा करने के लिए लेखक द्वारा रूपांतरित किया जाता है. नाटक अश्वत्थामा की पारंपरिक छवि से आगे बढ़ता है क्योंकि उसे अमरता उपहार में मिला है.

महाभारत में अश्वत्थामा एक कुंवारा पात्र है जबकि नाटक में उसका विवाह हुआ है और उसे रुद्रशक्ति नामक एक पुत्र भी है. अश्वत्थामा रात में हमला करके अपने पिता (जो पांडवों द्वारा धोखे से मारे गए थे) की मौत का बदला लेने का प्रयास करता है. हालांकि, वह अपने छोटे बच्चों की हत्या कर देता है और वह इतना शर्मिंदा होता है कि वह खुद की जान लेने की कोशिश करता है. (एलटीजी, 5:30 बजे शाम)

डॉन… ताके भालो लागे: सुजान मुखोपाध्याय का बंगाली नाटक, एक प्रसिद्ध कवि, थिएटर निर्देशक और अभिनेता सुभोमय दत्त के इर्द-गिर्द घूमता है, जिन्हें राज्य के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों के लिए गिरफ्तार किया गया है और अन्य छोटे अपराधियों के साथ हिरासत में बंद किया गया है. सुभामोय जेल को एक मंच में बदल देता है और 'मैड नाइट' डॉन क्विक्‍जोट की कहानी का प्रदर्शन करना शुरू कर देता है, जिसमें जेल के सभी कैदी इसके कलाकार होते हैं.

जेल की सेल मेटाफर्स और डॉन और उसके साथी, सांचो की विचित्र घटनाओं में रूपांतरित हो जाती है. आधुनिक समय की स्थिति में अनुकूलित, यह संगीत कार्निवल कीर्तन, फ्लैमेंको, रबींद्रनाथ के गीत, रॉक-एन-रोल, टोप्पा और पश्चिमी शास्त्रीय जैसे रूपों के साथ उभरता है. (कमानी, 7:00 बजे शाम)

आइटम: गुजराती निर्देशक अर्पिता धागट द्वारा निभाया गया, यह नाटक इस बात से शुरू होता है कि एक औसत मध्यवर्गीय परिवार में बड़ी होने वाली कोई भी लड़की परिवार का बेटा बनने की उम्मीद करती है. जब तक वे टूट नहीं जाते, तब तक ये लड़कियां परिवार का बेटा बनने का प्रयास करती रहती हैं. महिलाओं को कभी भी यह नहीं सिखाया गया है कि कैसे खुद से प्यार करें या अपनी पहचान का सम्मान करें.

वे प्रचलित लोकप्रिय संस्कृति के अनुसार सुंदरता के निर्धारित मानकों का पालन करने के लिए ही बनी हैं. हम, समाज, ये चाहते हैं कि महिलाएं एक अपेक्षित भूमिका निभाएं और सभी सामाजिक मानदंडों को अपनाकर उनका पालन करें. हम स्वतंत्र सोच वाली महिलाओं के साथ असुरक्षित हो जाते हैं जिनकी अपनी इच्‍छायें होती हैं. इस प्रकार, नाटक अपेक्षित भूमिकाओं और वास्तविकता की बात करता है, जिसे एक कहानी और लोकप्रिय कल्पना के रूप में वर्णित किया गया है. (अभिमान, 8:30 बजे रात)

राष्‍ट्रीय संगोष्‍ठी

राष्‍ट्रीय संगोष्‍ठी का दूसरा दिन "इज थिएटर इनक्लूसिव?" पर था, इसे दो सत्रों में विभाजित किया गया, जहां श्री सूर्य मोहन कुलश्रेष्ठ, सुश्री कलाई रानी और सुश्री श्रीजता रॉय के साथ प्रयाग शुक्ल ने पहले सत्र (दोपहर 2:00 बजे से 3:30 बजे तक) में श्रोताओं को संबोधित किया.

दूसरे सत्र में, जो 4 बजे से 5:30 बजे शाम तक निर्धारित था, उसमें श्री संजय सहाय, सुश्री अनीता चेरियन, सुश्री समीरा आयंगर और श्री अंशुमान भौमिक, साथ में अध्‍यक्ष के रूप में श्री त्रिपुरारी शरण ने इस सत्र में भाग लिया और श्रोताओं को संबोधित किया.

थिएटर की वर्तमान स्थिति के बारे में गहन चर्चा के साथ सत्रों का अनुसरण किया गया और सांस्कृतिक परिदृश्य में बदलाव सहित समय के साथ थिएटर कैसे बदल रहा है इसपर चर्चा हुई.

11 फ़रवरी 2019को होने वाले प्रदर्शनों की पमुख बातें:

1. फूल सिंह- नौटंकी (स्वांग)

निर्देशक: सतीश कश्यप; संध्या शर्मा

समूह: स्वांग, ए फोक आर्ट एकेडमी, हरियाणा

भाषा: हरियाणवी

अवधि: 1 घंटा 15 मिनट

2. स्वाभावजता

कहानी: अपू भारद्वाज

रूपांतर; निर्देशन: बहरुल इस्लाम

समूह: सीगुल थिएटर, गुवाहाटी

भाषा: हिंदी

अवधि: 1 घंटा 20 मिनट

3. बाली

नाटककार और निर्देशक: निम्मी राफेल

समूह: आदिशक्ति लेबोरेटरी फॉर थिएटर आर्ट रिसर्च, पांडिचेरी

भाषा: अंग्रेजी

अवधि: 1 घंटा 40 मिनट

4. निर्णय

नाटककार: डेविड ऑबर्न

अनुवादक और निर्देशक: अरुण मुखर्जी

समूह: निर्णय, कोलकाता

भाषा: बंगाली

अवधि: 2 घंटे 10 मिनट

5. डेसापैरसिडोस रु 43

नाटककार: निकोला पियानजोला

निर्देशक: अन्ना डोरा डोर्नो

समूह: इस्‍तांबिली वागंती

भाषा: अंग्रेजी और स्पेनिश

अवधि: 55 मिनट

डॉयरेक्‍टर्स मीट

(स्‍थान: योगा हॉल; राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, समय: सुबह 11 से दोपहर 1 बजे तक)

सत्र में भाग लेने वाले निर्देशकों का नाम:

1. निर्देशक: शशिधरन नादुविल (हिगिता - ए गूली'जी ऐंग्‍जाइटी एट दी पेनाल्‍टी किक

2. निर्देशक: इसराफिल शाहीन (मैकबेथ) 3. निर्देशक: जगदीश आर (अश्वत्‍थामन)

4. निर्देशक: सुजान मुखोपाध्याय (डॉन… ताके भालो लागे)

5. निर्देशक: अर्पिता धागट (आइटम) *

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