भोपाल. नई सरकार में प्रदेश में लगातार हो रहे अफसरों के तबादलों को लेकर अब सियासत होने लगी है. विपक्ष की भूमिका निभा रही बीजेपी इसे मुद्दा बनाकर सरकार का जमकर घेराव करने मे जुटी है. नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव के बाद पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान ने अब कमलनाथ सरकार पर हमला बोला है. शिवराज का कहना है कि 60 दिन में वादे के मुताबिक तो अब तक 6 मुख्यमंत्री बदले जाने चाहिए थे.

 शिवराज के बयान के बाद कांग्रेस हमलावर हो चली है औऱ जमकर पलटवार कर रही है. दरअसल, जब से कमलनाथ सरकार के हाथों में प्रदेश की बागडोर आई है तब से तबादलों का दौर जारी है. आए दिन अफसरों के तबादले हो रहे है.अब तक करीब दर्जनों की तादाद में अफसरों के तबादले हो चुके है, जिसको लेकर भाजपा ने कमलनाथ सरकार पर निशाना साधा है. मीडिया से चर्चा के दौरान शिवराज ने कहा कि बार-बार के तबादलों से अफसरों का मनोबल गिरता है.

तबादलों के जरिए प्रदेश में अराजकता का माहौल बन रहा है. मुख्यमंत्री के नाम पर कोई सुपर पावर तबादलों में जुटा हुआ है. 15 दिन में अफसर को बदल देने से प्रशासनिक व्यवस्था पर बुरा असर पड़ता है . शिवराज ने कहा कि सब के सब को बदल डालूंगा प्रशासन नही चलता है.हालांकि यह पहला मौका नही है जब शिवराज ने कमलनाथ सरकार को आड़े हाथों लिया हो.जब से प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी है तब से शिवराज लगातार सरकार के फैसलों और कानून व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहे है और सत्ता जाने के बाद भी बयानो से सुर्खियां बटोर रहे है.

धान खरीदी पर भी उठाए सवाल

 वही शिवराज ने किसानों की धान खरीदी पर भी सवाल उठाए है. 25 लाख किसानों की कर्जमाफी शिवराज ने कहा कि सीएम कमलमाथ से मिलकर किसानों की समस्यायों को लेकर चर्चा करुंगा. कर्जमाफी में सरकार का अलग अलग बयान सामने आता है, कभी 35 लाख तो कभी 25 लाख. 10 दिन में सरकार ने कर्जमाफी का वादा किया था, लेकिन दो महिने हो गए है और अबतक किसानों का कर्जा माफ नही हुआ है. 60 दिन में वादे के मुताबिक अबतक 6 मुख्यमंत्रियों को बदल जाना था.अगर ऐसा ही चलता रहा और किसानों की समस्या नही सुलझी तो बीजेपी आंदोलन करेगी.

पोस्टिंग को लेकर दलाल, ठेकेदार और ट्रांसफर माफिया सक्रिय 

इससे पहले नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कमलनाथ सरकार पर हमला बोलते हुए कहा था  भाजपा सरकार ने 15 साल में जितने ट्रांसफर नही किये उससे कही ज्यादा ट्रांसफर 50 दिनों में कर कांग्रेस ने प्रशासनिक व्यवस्था चौपट कर दी है. जनता यह जानना चाहती है की क्या यही है वक्त है बदलाव का. कमलनाथ सरकार ने 50 दिनों में 800 से ज्यादा वरिष्ठ अधिकारियों के ट्रांसफर कर प्रशासन को पंगु बना दिया है. अधिकारियों को जिस जगह तैनात किया जाता है उसे काम समझने  के पहले ही फिर से उनका ट्रांसफर कर दिया जाता है.  

 भार्गव का कहना था कि एक तरफ सरकार वित्तीय संकट का रोना रोतीं हैं वही दूसरी तरफ अधिकारियों के ट्रांसफर पर जनता के जेब का लगभग 100 करोड़ रूपयें का भार ट्रांसफर अलाउंस के नाम पर शासन पर पड़ रहा है. सरकार में ट्रांसफर पोस्टिंग को लेकर वल्लभ भवन से लेकर जिला और तहसील तक कांग्रेस के दलाल, ठेकेदार और ट्रांसफर माफिया सक्रिय है. जिससे प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है.

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