गुवाहटी. भाजपा ने पूर्वोत्तर में गठबंधन की प्रक्रिया पूरी कर ली है. पार्टी ने उत्तर पूर्वी आठ राज्यों की 25 लोकसभा सीटों में से कम से कम 22 जीतने का लक्ष्य रखा है. भाजपा महासचिव राम माधव ने बुधवार को यह जानकारी दी.

राम माधव ने मंगलवार आधी रात तक कई दौर की चर्चा की और असम गण परिषद (एजीपी), बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ), इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी), नेशनल पीपुल्स पार्टी, नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी और सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा के साथ गठबंधन किया.

भाजपा के पूर्वोत्तर प्रभारी माधव ने मंगलवार को आधी रात तक कई दौर की चर्चा की और असम गण परिषद (अगप), बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ), इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी), नेशनल पीपुल्स पार्टी, नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी और सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा के साथ गठबंधन किया. भाजपा नेता त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब और आईपीएफटी के नेताओं के साथ बुधवार को अगरतला में बैठक करेंगे. इस गठबंधन को पूर्वोत्तर लोकतांत्रिक गठबंधन (एनईडीए) के तहत अंतिम रूप दिया गया है. एनईडीए भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का क्षेत्र की क्षेत्रीय पार्टियों के साथ राजनीतिक गठबंधन है.

माधव ने फेसबुक पर पोस्ट किया, इस गठबंधन में क्षेत्र की 25 में से कम से कम 22 सीटें जीतने की क्षमता है और मोदी जी को एक बार फिर प्रधानमंत्री बनते देखने में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण है. मंगलवार को माधव ने नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो, असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल, मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा, मणिपुर के मुख्यमंत्री बिरेन सिंह, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू और एनईडीए के संयोजक हेमंत विश्व शर्मा से मुलाकात की. माधव ने एजीपी अध्यक्ष अतुल बोरा नीत पार्टी प्रतिनिधिमंडल से भी मुलाकात की और पूर्व सहयोगियों के गठबंधन को अंतिम रूप दिया. उन्होंने कहा, असम, नगालैंड, मेघालय, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में भाजपा, एनपीपी, एनडीपीपी, एजीपी एवं बीपीएफ कांग्रेस को हराने के लक्ष्य से साथ लड़ेंगे.

त्रिपुरा में भाजपा आईपीएफटी के साथ चुनाव लड़ेगी. उन्होंने बताया कि सिक्किम में भाजपा का गठबंधन मुख्य विपक्षी पार्टी सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा के साथ होगा. माधव ने कहा, विपक्ष अभी भी बातचीत कर रहा है और महागठबंधन बनाने के बारे में कह रहा है, लेकिन हमारा गठबंधन पूर्वोत्तर एवं देश के अन्य हिस्सों में हो चुका है. राजग आज पहले से कहीं ज्यादा मजबूत गठबंधन है.

नागरिकता (संशोधन) विधेयक के मुद्दे पर दो महीने पहले भाजपा से अपने संबंध समाप्त करने के बाद असम गण परिषद (अगप) एक बार फिर भगवा दल के साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ेगी. भाजपा महासचिव राम माधव, अगप अध्यक्ष अतुल बोरा और अन्य के साथ मंगलवार की मध्यरात्रि के बाद तक चली बैठक में गठबंधन को अंतिम रूप दिया गया. माधव ने ट्वीट किया, बैठक के बाद भाजपा और अगप ने आनेवाले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को हराने के लिए साथ काम करने का निर्णय लिया है. उन्होंने कहा, गुवाहाटी में भाजपा के नेता हेमंत विश्व शर्मा और अगप के अतुल बोरा और केशव महंत की उपस्थिति में यह घोषणा हुई. माधव ने बताया कि गठबंधन में तीसरा सहयोगी बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) है.

गठबंधन के बाद बोरा ने संवाददाताओं से कहा कि कांग्रेस को हराने के लिए पहले के सहयोगी फिर से साथ आ गये हैं. हालांकि, अगप प्रमुख ने नागरिकता (संशोधन) विधेयक और चुनाव के दौरान इस मुद्दे पर पार्टी के रुख को लेकर पूछे गये किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया. अगप ने नागरिकता (संशोधन) विधेयक पर कदम उठाने को लेकर असम में भाजपा सरकार से अपना समर्थन जनवरी में वापस ले लिया था. इस विधेयक में बांग्लादेश, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के गैर मुस्लिम लोगों को भारत में छह साल तक रहने के बाद नागरिकता देने की बात कही गयी है. इसका विरोध करते हुए अगप ने सार्वजनिक तौर पर भाजपा नेतृत्व की आलोचना की थी.

असम में 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 14 सीटों में से सात पर जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस और एआईयूडीएफ ने तीन-तीन सीटों पर जीत दर्ज की थी. एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार को जीत मिली थी. बीपीएफ और अगप का कोई उम्मीदवार जीत नहीं पाया था. वहीं, राज्य में 2016 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा, अगप और बीपीएफ ने मिलकर चुनाव लड़ा था और 2001 से राज्य की सत्ता पर लगातार काबिज कांग्रेस को हराया था.

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