भिवानी. दिल्ली हाई कोर्ट ने निजी प्रकाशकों की याचिका को ठुकराते हुए कड़ा रुख अख्तियार कर निजी स्कूलों को सख्त आदेश दिए हैं. इन आदेशों के बाद एक बार फिर निजी स्कूलों को कड़ी चेतावनी मिली है कि कोई भी निजी स्कूल निजी प्रकाशकों की पुस्तकें बच्चों पर नहीं थोप पाएगा. हाई कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की है कि जब पेपर निर्धारित पाठ्यक्रम की पुस्तकों में से ही आता है तो निजी प्रकाशकों की पुस्तकों को क्यों पढ़ाया जाए.

दरअसल सीबीएसई व हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड से सम्बद्धता रखने वाले निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की निर्धारित पाठ्यक्रम की पुस्तकें ही पढ़ाए जाने के सभी निजी स्कूलों को निर्देश मिले हुए हैं, मगर फिर भी कुछ निजी स्कूल कमीशनखोरी का धंधा चलाने के लिए निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकों को मनमाने ढंग से बच्चों व उनके अभिभावकों पर थोप रहे हैं. इससे पहले भारत सरकार व हरियाणा सरकार द्वारा भी कक्षा पहली से बारहवीं तक कक्षावार बच्चे के बस्ते का बोझ निर्धारित किए जाने के आदेश जारी किए हुए हैं. मगर इन सभी आदेशों की अवहेलना करते हुए निजी स्कूलों की मनमानी लगातार जारी थी.

इसी मामले में स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल परमार ने भी अपना रुख स्पष्ट करते हुए चेतावनी दी है कि अगर प्रदेश भर के निजी स्कूलों में कोई भी निजी स्कूल निजी प्रकाशकों की पुस्तकों को बच्चों पर थोपने का प्रयास करता है तो उसके खिलाफ न्यायालय की अवमानना को लेकर सख्त कार्रवाई की जाएगी.

संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल परमार ने बताया कि 10 दिसम्बर 2018 को हरियाणा सरकार द्वारा जारी सरकुलर के अनुसार निजी स्कूलों में कक्षा पहली से दूसरी तक  पाठयक्रम की पुस्तकों का बोझ दो किलोग्राम, तीसरी से पांचवीं तक दो से तीन किलोग्राम, छठी से सातवीं तक चार किलोग्राम, आठवीं से नौवीं तक चार से पांच किलोग्राम, दसवीं से बारहवीं तक पांच किलोग्राम तक ही बस्ते का बोझ निर्धारित किया है. 

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