नयी दिल्ली. देश की सड़कों पर प्रदूषण मुक्त इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सरकार बैटरी से चलने वाले सभी वाहनों का रजिस्ट्रेशन फीस माफ करेगी. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इसके लिए नोटिफिकेशन का प्रारूप जारी कर दिया है.

मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम (CMVR) 1989 के तहत दो तरह के रजिस्ट्रेशन फीस की व्यवस्था लाने की कवायद शुरू कर दी है. मंत्रालय ने CMVR के नियम 81 में बदलाव के लिए 18 जून को एक प्रारूप अधिसूचना जारी कर दी है.

बदलाव के द्वारा बैटरी से चलने वाले वाहनों को रजिस्ट्रेशन फीस से छूट देने का प्रस्ताव है. इस प्रारूप पर सभी पक्षों की राय मांगी गई है. नए नियम के मुताबिक बैटरी से चलने वाले दो, तीन या चार पहिया वाहनों को नए रजिस्ट्रेशन या पुराने के रीन्यूअल के लिए कोई फीस नहीं देना होगा.

सरकार यह चाहती है कि देश में प्रदूषण को कम करने के लिए अब ज्यादा से ज्यादा लोग इलेक्ट्रिक वाहन का इस्तेमाल करें. इससे तेल पर खर्च होने वाली डॉलर के मद में भारी राशि में कटौती होगी और रोजगार सृजन होगा.

गौरतलब है कि सरकार ने बैटरी से चलने वाले ई-रिक्शा को भी ट्रांसपोर्ट के वैध कॉमर्शियल माध्यम के रूप में मंजूरी दी है. छोटे और सुविधाजनक होने की वजह से ई-रिक्शा एनसीआर सहित देश के कई हिस्सों में यातायात के लोकप्रिय साधन बन गए हैं.

सच तो यह है कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ई-रिक्शा को लोकप्रिय बनाने के लिए एक बड़े कार्यक्रम की शुरुआत की थी. उन्होंने साल 2014 में अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में बेरोजगार नौजवानों में ई-रिक्शा वितरित किए थे, जो किफायती ब्याज दर पर दिए गए थे.

पिछले कुछ वर्षों से देश में चुपचाप एक तरह की इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति चल रही है, जिसमें मुख्य योगदान ई-रिक्शा का ही है. अक्टूबर 2018 तक देश में करीब 15 लाख बैटरी चालित ई-रिक्शा थे. राजधानी के नई दिल्ली इलाके में एक उद्यमी ने उबर जैसा ऐप 'स्मार्ट ई' नाम से लॉन्च किया है जिसके द्वारा 1000 ई-रिक्शा का संचालन किया जा रहा है.

इसके अलावा एग्रीगेटर ओला की इस साल भारत में 10000 ई-रिक्शा चलाने की योजना है. चीन में करीब 13.5 लाख इलेक्ट्रिक वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं. लेकिन ई-रिक्शा को छोड़ दें तो भारत में यह संख्या महज 7000 है. भारत की सबसे बड़ी ऑटो कंपनी मारुति सुजुकी के पास अभी तक कोई इलेक्ट्रिक वाहन नहीं है और कंपनी की योजना 2020 तक अपना पहला इलेक्ट्रिक वाहन लाने की है.

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग के लिए प्वाइंट साल 2018 की शुरुआत में महज 425 थे. सरकार की योजना 2022 तक ऐसे 2,800 पॉइंट तैयार करने की है. इसके अलावा गरीब रिक्शा चालकों को लोन न मिल पाना भी इसके प्रसार में एक बाधा है. सरकार की योजना ऐसा प्रेरक माहौल तैयार करने की है जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री हर साल बढ़कर 2 करोड़ तक पहुंच जाए.

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