कलाकार- मीजान,शारमिन जोशी,समीर धर्माधिकारी

निर्देशक- मंगेश हडावले

मूवी टाइप- Romance

अवधि- 2 घंटा 33 मिनट

मलाल के जरिए संजय लीला भंसाली ने अपनी भांजी शरमीन सैगल और अभिनेता और कॉमेडियन जावेद जाफरी के बेटे मीज़ान को बॉलीवुड में एंट्री दिलाई है. नेपोटिज्म की यह किस्त आपको रास आ सकती है क्योंकि बेहद आम से चेहरे वाले ये दोनों ही कलाकार अपने अभिनय से आपको प्रभावित करते हैं. 

कहानी: फिल्म में चॉल में रहने वाले टपोरी और बदमाश लड़के शिवा और वहां रहने आई नई लड़की आस्था चौधरी के प्यार के बीच का विलेन उनका बैकग्राउंड है. शुरूआत में शिवा आस्था को जरा भी पसंद नहीं करता, मगर फिर धीरे-धीरे उसे आस्था की मासूमियत और दूसरों की मदद करनेवाला स्वभाव भा जाता है. वहां आस्था के घरवाले उसकी मंगनी विदेश से लौटे अमीर लड़के से कर चुके हैं.

शिवा आस्था  के लिए अपनी सभी बुरी आदतें छोड़ने को तैयार है. वह आस्था के प्यार में अपनी जिंदगी की दिशा और दशा दोनों ही बदल देता है, मगर तभी उन दोनों के बीच प्यार का एक ऐसा नया दुश्मन पैदा हो जाता है. क्या शिवा और आस्था का प्यार अपनी मंजिल को पा सकेगा? इसके लिए तो आपको फिल्म देखनी होगी.

‘मलाल’ की एक बड़ी खामी यह है कि इसकी पटकथा, प्रेम कथाओं के एक सफल फॉर्मूले का इस्तेमाल करती है और उसी में सिमटकर रह जाती है. हालांकि मंगेश हडावले का कहानी कहने का तरीका इसे नया जरूर बनाता है लेकिन इतना रोचक नहीं कि आपको इस बात का अंदाजा न हो सके कि आगे क्या होने वाला है. 

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