नजरिया. कमलनाथ सरकार का बजट अच्छा है, इसमें किसानों, युवाओं, महिलाओं, साफ्ट हिन्दूत्व पर विशेष ध्यान दिया गया है, जाहिर है इसका मकसद जनकल्याण के साथ-साथ अपनी सियासी सुरक्षा दीवार भी तैयार करना है, लेकिन यह जमीनी हकीकत में बदले तो बात बने!

एमपी में करीब पन्द्रह वर्ष बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस सरकार ने प्रदेश का पहला आम बजट पेश किया. दो लाख तैतीस हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के इस बजट में किसानों, युवाओं, महिलाओं, साफ्ट हिन्दूत्व पर विशेष ध्यान दिया गया है. यही नहीं, इसमें स्वास्थ्य का अधिकार, पानी का अधिकार आदि लागू किए जाने का इरादा भी दिखाया गया है.

एमपी के वित्त मंत्री तरुण भनोट ने विधानसभा में बजट 2019 पेश किया, जोकि घाटे का बजट है जिसमें 3. 34 प्रतिशत राजकोषीय घाटा है. हालांकि, उन्होंने पीएम मोदी की केंद्र सरकार पर एमपी के साथ भेदभाव किए जाने का आरोप लगाया है कि केंद्र द्वारा राज्य को दी जाने वाली राशि में 2,700 करोड़ रुपये की कटौती की गई है.

इस बजट में किसानों पर फोकस करते हुए कृषि विभाग के बजट में 66 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है. इतना ही नहीं, किसान कर्जमाफ के तहत जय किसान फसल ऋण माफी योजना के लिए 8,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.

जहां सरकार किसानों को पशुपालन और मछुआरों को रियायती ब्याज दर पर ऋण के लिए क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराएगी, वहीं महिलाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए ई-रिक्शा योजना शुरू कर रही है. इसके अलावा, मध्याह्न भोजन योजना का खाद्यान्न महिला स्वास्थ्य समूहों के द्वारा आपूर्ति किए जाने का भी सरकार इरादा रखती है.

देने के इरादे के साथ ही प्रादेशिक सरकार ने यहां स्थापित होने वाले उद्योगों में 70 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार देने का कानून बनाने का भी जिक्र किया है.

मंदिर भूमि को सरकारी राशि से विकसित करना, एक हजार गौ शालाओं के लिये 132 करोड़ रुपये, गोवंश पर पुरानी गौशाला में हर दिन 20 रुपये, पुजारियों के मानदेय में तीन गुना वृद्धि, पुजारी कल्याण कोष मठ मंदिर सलाहकार समिति का गठन, रामवनगमन पथ के अंचलों के विकास के लिये प्रावधान जैसे ऐलान बताते हैं कि कमलनाथ सरकार साफ्ट हिन्दूत्व पर आगे बढ़ रही है.

एमपी के लोकप्रिय प्राॅडक्ट को देश-दुनिया तक पहुंचाने के लिए रतलाम के नमकीन, भिंड का पेड़ा, मुरैना की गजक, सागर की चिरोंजी की बर्फी, छतरपुर-टीकमगढ़ के पीतल कारोबार आदि के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे.

इस बजट में और भी बहुत कुछ है, जो यदि हकीकत की जमीन पर उतर आता है तो यकीनन जनता को लाभ मिल पाएगा, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि राजकोषीय घाटे के चलते यह किस तरह से संभव हो पाएगा?

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