नई दिल्ली. 2020 का ओलंपिक खेल जापान के टोक्यो में खेला जाएगा. इस आयोजन के लिए जापान ने तैयारी लगभग पूरी कर ली है. 1964 में जब पहली बार टोक्यो में ओलिंपिक खेलों का आयोजन हुआ था, तब इस शहर ने दुनिया को नए जापान से रू-ब-रू कराया था. जापान ने तब दुनिया को दिखाया था कि वह दूसरे वर्ल्ड वार की बर्बादी से उबर चुका है और तेज रफ्तार से आगे बढ़ रहा है.

अब करीब आधी सदी के बाद ओलिंपिक खेल दोबारा टोक्यो लौट रहे हैं. ओलिंपिक खेलों के स्वागत में पूरे जोश के साथ जुट चुका तोक्यो एक बार फिर जापान की शानदार इमेज प्रस्तुत करेगा. तोक्यो का दावा है कि ये खेल अब तक इतिहास में 'सर्वाधिक प्रगतिशील' साबित होंगे. आगे की स्लाइड्स में देखें ओलिंपिक 2020 में क्या-क्या खास तैयारियां कर रहा है तोक्यो. इस बार ओलिंपिक खेलों के लिए रोबोट को मैस्कॉट्स (शुभंकर) चुना गया है. मिराइतोवा और सोमेइटी (रोबोट के नाम) को क्रमश: तोक्यो 2020 ओलिंपिक और पैरालिंपिक के लिए मैस्कॉट होंगे. ये मेस्कॉट यहां आए ऐथलीट्स और अतिथियों का स्वागत करेंगे.

जापान ने ओलिंपिक के लिए रोबॉट्स को लेकर और भी खास इंतजाम किए हैं. ओलिंपिक खेलों की कुछ प्रतिस्पर्धाओं में ये रोबॉट्स ही सहायक की भूमिका निभाएंगे. हैमर और जैवलिन थ्रो जैसे खेलों में ये रोबॉट्स ही हैमर और जैवलिन को वापस लाते दिखेंगे. वर्चुअल वर्ल्ड में दुनिया भर से लोगों को इन खेलों के करीब लाने की जिम्मेदारी भी रोबॉट्स को सौंपी गई है.1964 ओलिंपिक खेलों के लिए जापान ने जिस स्टेडियम का इस्तेमाल किया था. अब वहां पर नया नैशनल स्टेडियम बनाया जा रहा है. इस स्टेडियम को 1.25 डॉलर (करीब 90 अरब रुपये) की लागत से तैयार किया जा रहा है. इस स्टेडियम में ओलिंपिक खेलों की ओपनिंग-क्लोजिंग सेरिमनी के अलावा कई खेलों का आयोजन होगा. ओलिंपिक खेलों के इतिहास में यह पहली बार होगा, जब इन खेलों के लिए पृथ्वी की कक्षा में एक खास सैटेलाइट स्थापित किया जाएगा. इस सैटलाइट को इंटरनैशनल स्पेस स्टेशन तक रॉकेट द्वारा पहुंचाकर लॉन्च किया जाएगा.

इन खेलों में 206 देशों के 11 हजार से ज्यादा ऐथलीट्स हिस्सा लेने पहुंचेंगे. इस दौरान यहां 339 स्वर्ण पदक दांव पर होंगे. यह ओलिंपिक खेलों में अब तक के सबसे ज्यादा मेडल हैं, जो किसी एक ओलिंपिक खेल में दांव पर होंगे. ओलिंपिक इतिहास में यह पहली बार है, जब इन खेलों के लिए रिसाइकल्ड मेटल्स का इस्तेमाल किया गया है. मोबाइल रिसाइकल्ड के जरिए तोक्यो ओलिंपिक के सभी मेडल तैयार किए गए हैं. इस मुहिम में पुराने गैजेट्स से 32 किलो सोना, 3,500 किलो चांदी और 2,200 किलो तांबा निकाला गया.

ओलिंपिक खेलों से जुड़ी एक रिपोर्ट के मुताबिक इन खेलों के दौरान प्रतिदिन 14 हजार होटल के कमरों की कमी होगी. तोक्यो ने इससे निपटने के भी शानदार इंतजाम कर लिए हैं. इस कमी को पूरा करने के लिए जापान अपने जहाजों को इस्तेमाल में लाएगा. बड़े-बड़े क्रूज में होटल तैयार किए जा रहे हैं, जो तोक्यो की खाड़ी में तैनात किए जाएंगे.

शुरुआत में जब इन खेलों के आयोजन की तैयारियां शुरू हो रही थीं तब इन खेलों की लागत 6.6 बिलियन डॉलर (करीब पौने 5 खरब रुपये) का अनुमान जताया गया था, लेकिन अब यह आंकड़ा बढ़कर 20-30 बिलियन डॉलर (14-21 खरब रुपये) तक पहुंच चुका है.

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