नई दिल्ली. हर साल कई अरब रुपए रेलवे सिर्फ चूहों, काक्रोचों को समाप्त करने के लिए खर्च करता है, लेकिन पेस्ट कंट्रोल के नाम पर किस दर्जे की अंधेरगर्दी मची है, इसका खुलासा आरटीआई में हुआ है. जिसमें जानकारी दी गई है कि रेलवे को एक चूहा पकडऩे में 22 हजार रुपए खर्च करना पड़ता है. यह मामला चेन्नई रेल मंडल में सामने आया है. जहां मई 2016 से अप्रैल 2019 तक 5.89 करोड़ रुपये खर्च किए हैं.

भारतीय रेलवे के किसी स्टेशन पर खड़े-खड़े आपकी निगाह ट्रैक पर धमाचौकड़ी मचाते चूहों पर जरूर गई होगी. कभी-कभी तो बहुत ही मोटे ताजे चूहे दिखाई दे जाते हैं. रेलवे इन चूहों से बहुत परेशान है, लेकिन क्या आपको पता है कि एक रेल डिवीजन में सरकार ने इस परेशानी से बचने के लिए हर चूहे पर औसतन 22,300 रुपये खर्च कर रहा है. बेशक ये जानकारी चौंकाने वाली है, लेकिन यही हकीकत है. रेलवे की चेन्नई डिवीजन ऐसा ही कर रहा है. आरटीआई में खुलासा हुआ है कि चेन्नई डिवीजन ने चूहे पकडऩे में भारी-भरकम रकम खर्च की.

चेन्नई ने 3 साल में चूहों पर खर्च किए 5.89 करोड़ रुपये

चेन्नई डिवीजन ऑफिस ने आरटीआई का जवाब देते हुए कहा है कि वो पिछले काफी समय से चूहों से परेशान है. रेलवे स्टेशन और इसके कोचिंग सेंटर में भी चूहे परेशान कर रहे हैं. लेकिन उनसे निपटने का काम भी चल रहा है. 17 जुलाई को आरटीआई में जो जानकारी मिली है वो बेहद ही चौंकाने वाली है. डिवीजन के अनुसार उन्होंने मई 2016 से अप्रैल 2019 तक 5.89 करोड़ रुपये खर्च किए हैं.

किस बिल से कितने चूहे पकड़े

चेन्नई डिवीजन से जब ये पूछा गया कि कितने चूहे पकड़े गए हैं तो उन्होंने सिर्फ 2018-19 की ही जानकारी देते हुए बताया कि 2636 चूहे पकड़े गए हैं, जिसमें चेन्नई सेंट्रल, चेन्नई एग्मोर, चेंगलपट्टू, तामब्रम और जोलारपेट रेलवे स्टेशन पर 1715 चूहे पकड़े गए हैं और रेलवे के कोचिंग सेंटर में 921 चूहे पकड़े गए हैं. इस हिसाब से देखें तो चेन्नई डिवीजन ने एक चूहा पकडऩे के एवज में औसतन 22,344 रुपये खर्च किए.

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