अनेक संस्कृतियों और सभ्यताओं वाले देश भारत में रहकर भी अगर आप हिमाचल प्रदेश की इस खास जगह घूमने नहीं गए तो आप सफल घुमक्कड़ी नहीं कहलाएंगे. इतनी यात्राएं करके भी आपकी यात्रा अधूरी है अगर आपने चंबा नहीं घूमा . आज हम आपको इस हिमालयी प्रदेश के चंबा की खूबियों और मनमोहक जगहों के विषय में बताएंगे जो सिर्फ उत्तर भारत के इसी प्रदेश में है. कहीं घूमने की तैयारी कर रहे हैं तो इस बार चंबा घूम ही आइए. 

दिल चुराने वाला चंबा का मौसम आपकी हर तकलीफ को दूर कर देगा. कहा जाता है कि चंबा शहर का नाम वहां की राजकुमारी चंपावती के नाम पर पड़ा. कहा जाता है कि राजकुमारी चंपावती हर दिन शिक्षा के लिए एक साधु के पास जाती थी. इससे राजा को शक हो गया और वो एक दिन राजकुमारी के पीछे-पीछे आश्रम पहुंच गया. वहां उसे कोई नहीं मिला लेकिन उसे शक करने की सजा मिली और उससे उसकी बेटी छीन ली गई. आसमान में आकाशवाणी हुई कि प्रायश्चित करने के लिए राजा को यहां मंदिर बनवाना होगा. राजा ने चौगान मैदान के पास एक सुंदर मंदिर बनवाया. चंपावती मंदिर को लोग चमेसनी देवी के नाम से पुकारते हैं.

चंबा का दिल है चौगान 

चंपावती मंदिर के सामने एक विशाल मैदान है, जिसे चौगान कहते हैं. एक तरह से चौगान चंबा शहर का दिल है. किसी समय चौगान का यह मैदान बहुत बड़ा था लेकिन बाद में इसे पांच हिस्सों में बांट दिया गया. मुख्य मैदान के अलावा अब यहां चार छोटे-छोटे मैदान हैं. चौगान मैदान में ही हर साल जुलाई में चंबा का मशहूर पिंजर मेला लगता है.चंबा के आसपास कुल 75 प्राचीन मंदिर हैं. इन मंदिरों में प्रमुख लक्ष्मीनारायण मंदिर, हरिराय मंदिर, चामुंडा मंदिर हैं.

भूरी सिंह संग्रहालय 

किसी भी शहर के इतिहास को जानने के लिए यहां के म्यूजियम को जरूर देखना चाहिए. बेशक चंबा का भूरी सिंह म्यूजियम छोटा है, पर इसका प्रबंधन बेजोड़ है. इस म्यूजियम के प्रथम तल पर मिनिएचर पेंटिंग की सुंदर गैलरी है. इसमें गुलेर शैली की बनी पेंटिंग लगाई गई हैं. यहां चंबा शहर की पुरानी ब्लैक एंड वाइट तस्वीरें भी देखी जा सकती हैं.

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