नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने खेतों में फसल के अवशेष जलाने पर सख्त कदम उठाया है. फसल के अवशेष जलाने से बढ़ रहे प्रदूषण की रोकथाम के लिए अब जिले में स्पेशल सेल गठित की जाएगी. सेल के जरिए प्रत्येक दिन मॉनीटरिंग की जाएगी. अगर कोई किसान फसलोें के अवशेष पुआल जलाता पकड़ा गया तो, उस पर जुर्माना लगाया जाएगा.शासन का निर्देश जारी होने के बाद प्रशासन इसे प्रभावी बनाने में जुट गया है. कृषि विभाग की ओर से इसके लिए जागरूकता गोष्ठी आयोजित कर लोगों को जागरूक किया जाएगा.

धान की कटाई कुछ दिनों में शुरू हो जाएगी. इस दौरान कई बड़े किसान मशीन से धान की कटाई करा लेते हैं और पराली को खेत में ही जला देते हैं. खरीफ के मौसम में फसलों के अवशेष जलाने से हो रहे प्रदूषण की रोकथाम के लिए जनपद में एक सेल का गठन किया जाएगा. जिसमें अपर जिलाधिकारी अध्यक्ष, अपर पुलिस अधीक्षक, उप कृषि निदेशक और मुख्य अग्निशमन अधिकारी सदस्य होंगे.

टीम की ओर से ग्राम प्रधानों, पर्यावरण प्रेमियों और क्षेत्रीय लेखपालों के से निगरानी कराई जाएगी. किसी भी दशा में जनपद के किसी भी क्षेत्र में धान का पुआल, कृषि अपशिष्ट जलाए गए तो संबंधित किसान को दंडित किया जाएगा. इसमें राजस्व अनुभाग 10 के शासनादेश के हिसाब से क्षतिपूर्ति की वसूली एवं पुनरावृत्ति होने पर संबंधित के खिलाफ अर्थदंड लगाया जाएगा. उप निदेशक कृषि अरविंद सिंह ने कहा कि इसमें दो एकड़ पर ढाई हजार, दो से पांच एकड़ पर पांच हजार और पांच एकड़ से अधिक होने पर 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा.

सेल के सभी सदस्यों को दायित्व होगा कि धान कटने के समय से लेकर रबी में गेहूं की बुवाई तक प्रतिदिन फसल अवशेष जलाने की घटनाओं एवं इसकी रोकथाम करने का काम करेंगे. कहा कि चयनित सदस्य निगरानी कर रहे हैं. अगर किसी भी किसान को अवशेष जलाता पकड़ा गया, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. उप निदेशक ने कहा कि शुरूआत में किसानों को जागरूक किया जा रहा है.

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