सर्दी के मौसम में किसान-बागवान विभिन्न फलदार पौधों की रोपाई का कार्य शुरू कर देते हैं. इसके लिए बागवानों को बारिश का इंतजार होता है. इस बार समय पर अच्छी बारिश हुई है. अब बागवान सेब, खुमानी, प्लम, नाशपाती और अखरोट की रोपाई के लिए गड्ढे बनाने का कार्य शुरू कर सकते हैं.नए बगीचे लगाने से पूर्व और बगीचों की तुड़ाई के बाद मिट्टी के नमूने लेकर प्रयोगशाला में विश्लेषण के लिए भेजें. नौणी विवि के विशेषज्ञों ने किसानों-बागवानों को सलाह दी है कि वर्षा से खेतों में अच्छी नमी है, जिसमें वे अब अपने खेतों और बगीचों की तैयारी कर सकते हैं.

इसमें विभिन्न फलदार पौधों की रोपाई के लिए करीब तीन फुट गड्ढा खोदें और उसमें गोबर मिलाएं. बगीचे में गिरे फल-पत्तियों को एकत्रित कर गोबर के गड्डों में डालकर उन्हें नष्ट करें. इससेे दिसंबर और जनवरी से पौधों की रोपाई का कार्य भी शुरू हो जाएगा. इसके अलावा ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब की तुड़ाई का काम जारी रखें. अखरोट, पीकन नट, किवी, मौसमी तथा माल्टा की तुड़ाई आरंभ कर दें.

पशुधन संबंधित कार्य

इस माह दिन-रात के तापमान में अंतर होने के कारण पशुओं में श्वास की बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है. पशुपालकों को रात के समय में पशुओं नवजात बछड़ों को कम तापमान से बचाव की सलाह दी है. नवजात और युवा पशुओं को रात के समय सूखी बोरियों से ढककर रखें. पशुओं के लिए बिछाए जाने वाले घास या भूस के बिछोने को प्रतिदिन बदल दें, जिससे गौशाला का फर्श साफ तथा सूखा रहे. पहाड़ों के कुछ क्षेत्रों में इस समय शहद का प्रवाह होता है तथा उसके अनुसार ही मौनवंशों का प्रबंध करें. मौनवंशों में सफाई का ध्यान रखें तथा तलपटों की विशेषरूप से सफाई करें.

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