मुंबई , न्यू इण्डिया में क्या बुजुर्गों की आवाज सुनी जायेगी ? यह सवाल खड़ा होता है बारिश की धार में अपनी आशा के दीपक को जलाये रखने का संघर्ष कर रहे बुजुर्गों को देखकर. ये बुजुर्ग आंदोलन कर रहे हैं देश की बैंकिंग प्रणाली का सञ्चालन करने वाले देश के केंद्रीय बैंक रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया  के खिलाफ.

लेकिन सरकार चुनाव प्रचार के शोर में व्यस्त है ऐसे में इनकी कहानी सुनने के पास किसे वक्त है. सरकार ने आदेश दे दिया और पुलिस ने उन्हें खदेड़ कर वंहा से भगा दिया ! लेकिन पंजाब महाराष्ट्र बैंक में अपना पैसा या यूं कह लें अपनी जमा पूंजी रखने वाले खाताधारक उसकी परवाह किये बगैर अपना विरोध दर्ज कराने निकल पड़े. खबर आयी है की एक और खातेदार की हृदयाघात से मौत हो गयी. यह आंकड़ा 9 हो गया है.

यह कोई नहीं चाहता होगा की इसमें वृद्धि हो लेकिन जिस तरह से प्रदर्शन के दौरान कई वृद्ध महिला और पुरुष खातेदारों की तबियत खराब हो गयी है उससे इस बात के संकेत तो मिल ही रहे हैं की सदमा बहुत गंभीर है ? यदि इतना गंभीर नहीं होता तो लोग क्यों अपनी जान जोखिम में डाल ,बारिश में भीजते हुए उस सरकार को जगाने की कोशिश कर रहे थे ? यह पता होते हुए की सरकार अपनी कुर्सी बचाने की कसरत में जुटे हुए हैं और वे उनके दुःख दर्द सुनने नहीं आयेंगें फिर भी लोग घरों से निकलकर आये ? यह भी दर्शाता है की मामला बहुत गंभीर है. इस बीच खबर आयी है की पीएमसी बैंक के एक और खाताधारक की मौत हो गई है.

80 साल के मुरलीधर धारा की हार्ट अटैक से मौत का मामला सामने आया है. मुरलीधर मुलुंड के रहने वाले थे. मृतक के बेटे प्रेम धारा ने खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि लंबे समय से उनके पिता बीमार थे और उनकी बाय पास सर्जरी कराना थी. जिसके लिए पैसे की जरूरत थी. लेकिन सही समय पर पैसे न जुटा पाने के कारण प्रेम अपने पिता का इलाज नही करा पाए.

ऐसा नहीं की उनके पास पैसा नहीं था. उनके पिता ने अपनी वृद्धावस्था के लिए लाखों रुपये पीएमसी बैंक में सहेजकर रखा था ,लेकिन वक्त आने पर वह बैंक ही धोखा दे गया ? बैंक डूब गया और यह सदमा मुरलीधर नहीं झेल सके ,इलाज के अभाव में जान चली गयी. देश की सर्वोच्च न्याय संस्था सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलने के चलते खाताधारकों में नाराज़गी भी है और कंही ना कंही कुछ हताशा भी. जिन्हें चुनकर देश या राज्य चलाने को दिया था ,वे अपनी कुर्सी के चक्कर में व्यस्त हैं लिहाजा बैंक के खाताधारकों ने मुंबई में एशियाटिक लाइब्रेरी के पास रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) का दफ्तर घेर लिया और विरोध प्रदर्शन किया.

इस दौरान कई लोगों की तबीयत भी खराब हो गई. पुलिस ने भीड़ को तितर बितर करने के लिए कई लोगों को खदेड़ा. इस दौरान प्रदर्शन कर रहे खताधारकों ने सड़क से गुज़र रही गाड़ियों का रास्ता रोक दिया. खाताधारकों के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए आरबीआई के बाहर पुलिस ने कड़े बंदोबस्त किए थे. पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों को गेट पर रोक लिया था. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पीएमसी बैंक से नगदी निकालने पर आरबीआई की ओर से लगाई गई रोक हटाने की मांग कर रहे पीएमसी खाताधारकों की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि हम अनुच्छेद 32 (रिट अधिकार क्षेत्र) के तहत इस याचिका की सुनवाई नहीं करना चाहते.

याचिकाकर्ता उचित राहत के लिए संबंधित हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं. सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने इस बारे में कहा कि सरकार इस स्थिति की गंभीरता से परिचित है और प्रवर्तन निदेशालय दोषी के खिलाफ उचित कार्रवाई कर रहा है. लेकिन सवाल लोगों के पैसों का है ,जिससे उनके जीवन की आये दिन की दिनचर्या या गतिविधियां जुडी हुई हैं. इस देश में विलफुल डिफॉलटर्स की सूची जितनी लम्बी होती जा रही है उससे लोगों का बैंकों से विश्वास उतना ही तेजी से कम होता जा रहा है.

सरकार चुनाव का बहाना कर अपना पल्ला झाड़ कर खड़े हो गए हैं लेकिन यह मामला देश की बैंकिंग व्यवस्था के विश्वास से जुड़ा है फिर इस मामले में तत्परता क्यों नहीं देखने को मिल रही ? क्या यही है न्यू इण्डिया जंहा लोगों को अपने हक़ और हकूक के लिए जान की बाजी लगानी पड़ेगी और अपनी मेहनत का पैसा हांसिल करने के लिए सरकार के समक्ष हाथ फैलाये किसी लाचार व्यक्ति की तरह खड़ा होना होगा ? इन खाताधारकों को हाईकोर्ट से कुछ राहत भी मिली लेकिन उन्हें अपनी जमा पूंजी कब मिलेगी यह बड़ा सवाल आज भी बना हुआ है .

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