लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की 182 मीटर की प्रतिमा स्टेच्यू ऑफ यूनिटी ने कमाई के मामले में मोहब्बत की निशानी ताजमहल को भी पीछे छोड़ दिया है. स्टेच्यू ऑफ यूनिटी ने एक साल में 63 करोड़ रुपए की कमाई की जबकि, ताजमहल को फीस के तौर पर 56 करोड़ रुपए हासिल हुए. आर्कियोलोजिकल सर्वेक्षण ऑफ इंडिया की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, पर्यटकों की तादाद के मामले में हालांकि, ताजमहल ही अव्वल है. ताजमहल देखने के लिए 64.58 लाख लोग पहुंचे जबकि, एक साल में 24 लाख लोगों ने स्टेच्यू ऑफ यूनिटी देखा. इस लिस्ट में कुतुबमीनार, आगरा किला, लाल किला और फतेहपुर सीकरी को भी शामिल किया गया है.

स्टेच्यू ऑफ यूनिटी और ताज महल के अलावा बात करें तो एक साल में 24.98 लाख लोगों ने आगरा किला देखा. जिससे 30.55 करोड़ रुपये की कमाई हुई. इसी तरह कुतुबमीनार देखने पहुंचे 29.23 लाख लोगों से 23.46 करोड़ रुपये मिले. इसी तरह फतेहपुर सीकरी देखने आए 12.63 लाख लोगों से सरकार के खजाने में 19.04 करोड़ रुपये आए. लाल किला देखने पहुंचे 31.79 लाख लोगों से 16.17 करोड़ रुपये की कमाई हुई. आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा किए गए अध्ययन में कहा गया कि स्टेच्यू ऑफ यूनिटी देश के श्रेष्ठ 5 स्मारकों में सबसे ज्यादा कमाई करने वाला स्मारक बन गया है.

स्टेच्यू ऑफ यूनिटी

31 अक्टूबर को ही स्टेच्यू ऑफ़ यूनिटी को बने एक साल पूरा हुआ है. सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा स्टेच्यू ऑफ यूनिटी 182 मीटर ऊंची है और ये दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है. ये मूर्ति सरदार सरोवर बांध से 3.2 किलोमीटर दूर साधू बेट नाम के स्थान पर है जो नर्मदा नदी पर एक टापू है. मूर्ति को बनाने में 3 हजार से ज्यादा लोग और 250 से ज्यादा इंजीनियरों ने काम किया.

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