मुंबई. महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन पर स्थिति स्पष्ट हो गयी है और आने वाले एक दो दिन में शिवसेना -कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता राज्यपाल से मिलकर दावा पेश कर सकते हैं. रविवार को शरद पवार की दिल्ली में सोनिया गांधी से मुलाक़ात है. यह खबर है की अहमद पटेल ने दिल्ली में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को पूरी तस्वीर स्पष्ट कर दी है. पटेल ने एनसीपी और शिवसेना के साथ हुई बातचीत का ब्योरा दिया. माना जा रहा है कि सोनिया और पटेल के बीच न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) पर भी चर्चा हुई है. 40 बिंदुओं वाले सीएमपी में विवादित मुद्दों को जगह नहीं दी गई है.

इनमें हिंदुत्व ,मुस्लिम आरक्षण और समान नागरिक संहिता का मुद्दा प्रमुख था. शिवसेना को इन तीनों को लेकर मना लिया गया है. भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनावों के द्वारा एक नारा दिया था मोदी है तो मुमकिन है  लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में अब यह नारा विधानसभा चुनावों के बाद ज्यादा चर्चित है. नारे में मोदी का स्थान पवार ने ले लिया है बस इतना सा ही बदल हुआ है.पवार हैं तो एक दक्षिण पंथी पार्टी अपनी समान विचारधारा वाली दक्षिण पंथी पार्टी का 30 साल पुराना साथ छोड़कर मध्यम मार्गी पार्टी से हाथ मिलाकर सरकार बनाने को तैयार हो गयी.

अब सवाल यह है की वर्षों से हिंदुत्व की बात करने और उसे अपनी विचारधारा बताने वाली पार्टियां सत्ता के गठबंधन के समय सबसे पहले उसे ही क्यों तिलांजली दे देती हैं ? यह बात वर्तमान परिस्थिति में शिवसेना को लेकर ही नहीं है. केंद्र में जब अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में सरकारें बनी उस समय भी यह सवाल खड़े हुए थे. अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार को चलाने में सबसे बड़ी वैशाखी तो जार्ज फर्नांडीज और जयललिता और ममता बनर्जी ही बने थे. उस समय भी हिंदुत्व वादी राजनीति के बड़े चेहरे लालकृष्ण आडवाणी को पीछे कर अटल बिहारी वाजपेयी को आगे लाया गया था. एक न्यूनतम साझा कार्यक्रम बना जो आज भी बन रहा है.

शिवसेना -कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस की साझा सरकार , क्या हिंदुत्व की विचारधारा इसमें रोड़ा बनेगी ? शिवसेना नेता संजय राउत ने हालांकि इस विषय पर पार्टी का रुख साफ़ किया है और कहा है कि इसको लेकर कोई टकराव नहीं. ऐसे में शरद पवार और सोनिया गांधी की बैठक को महज एक औपचारिकता ही माना जा रहा है. वंही शुक्रवार को नागपुर दौरे के दौरान शरद पवार ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि नई सरकार बनाने को लेकर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के नेताओं ने राज्यपाल से शनिवार को मुलाकात का वक्त मांगा है. इस मुलाकात में किसानों के मुद्दे पर चर्चा की संभावना है.

सूत्रों के मुताबिक तीनों पार्टियों के नेता इस दौरान सरकार बनाने का दावा भी पेश कर सकते हैं. एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा, 'महाराष्ट्र के राज्यपाल ने शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के नेताओं को मुलाकात के लिए कल दोपहर तीन बजे का वक्त दिया है. राज्यपाल के साथ किसानों के मुद्दे पर चर्चा की जाएगी.' इससे पहले एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने नागपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सरकार गठन की कवायद पर मुहर लगाई. पवार ने कहा, 'सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.

सरकार पूरे पांच साल तक चलेगी.' एनसीपी अध्यक्ष ने साथ ही कहा कि महाराष्ट्र के किसानों को बेमौसम बारिश की वजह से काफी नुकसान झेलना पड़ा है और केंद्र सरकार को उनकी मदद के लिए कदम उठाना चाहिए. एनसीपी प्रमुख और पूर्व सीएम ने कहा, अतिवृष्टि के कारण संतरे को बहुत नुकसान हुआ है. संतरा किसानों से मैंने खुद निजी तौर पर चर्चा की है. 60 से 70 फीसदी तक उनकी फसल पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है. संतरा उत्पादक बहुत बड़े संकट से गुजर रहे हैं.

महाराष्ट्र में किसानों की हालत दयनीय है और जो बची हुई फसल है उनमें भी घुन लगने की आशंका है. सूत्रों का कहना है कि सरकार गठन के फॉर्म्युले के तहत शिवसेना कोटे से 16 , एनसीपी कोटे से 14 और कांग्रेस कोटे से 12 कैबिनेट मंत्री बनाए जा सकते हैं. इसके साथ ही विधानसभा स्पीकर का पद कांग्रेस को दिया जा सकता है, वहीं डेप्युटी स्पीकर पोस्ट शिवसेना के हिस्से में जा सकती है. विधान परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का पद एनसीपी और शिवसेना के खाते में जा सकता है. ऐसी अटकलें हैं कि सीएम का पद शिवसेना को देने के साथ ही एनसीपी और कांग्रेस की तरफ से एक-एक डेप्युटी सीएम बनाए जा सकते हैं.

सरकार गठन को लेकर शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की पुण्यतिथि यानी 17 नवंबर को कोई बड़ा ऐलान हो सकता है. शिवसेना ने अपने सभी विधायकों को 17 नवंबर को मुंबई में मौजूद रहने के लिए कहा है.शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस के बीच चर्चा के बाद न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) का जो ड्राफ्ट तैयार हुआ है, उसमें 40 पॉइंट लिए गए हैं. इसमें तीनों पार्टियों के चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वादों को तरजीह दी गई है. सीएमपी के ड्राफ्ट में तीनों पार्टियों के चुनावी घोषणा पत्र में शामिल मुद्दों को लिया गया है.

इसमें किसानों की कर्जमाफी, बेरोजगारी और महंगाई से निपटने के उपाय, छात्रों की समस्याओं को हल करने को महत्व दिया गया है.इसके साथ ही अल्पसंख्यकों को शिक्षा में पांच फीसदी आरक्षण पर शिवसेना को विरोध न करने के लिए राजी किया गया है. इस मसौदे को सोनिया गांधी, शरद पवार और उद्धव ठाकरे के पास भेजा गया है. कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा है कि सीएमपी के ड्राफ्ट पर उनकी नेता सोनिया गांधी की मंजूरी मिलते ही राज्य में शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस सरकार बनेगी.

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