नजरिया. एनएसएसओ से जारी आंकड़ों के अनुसार देश की जीडीपी छह वर्ष के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है. ये आंकड़े सामने आने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का कहना था कि स्थिति बहुत ही चिंताजनक है. जारी किए गए जीडीपी के आंकड़े 4.5 प्रतिशत तक हैं, यह स्पष्ट रूप से अस्वीकार्य हैं! अपनी सादगी और अर्थव्यवस्था पर प्रभावी पकड़ के लिए पहचानेे जानेवाले पूर्व प्रधानमंत्री सिंह का कहना था कि मैं देश के एक जागरूक नागरिक की तरह ये सब कह रहा हूं,

इसमें राजनीति को शामिल नहीं किया जाना चाहिए? सिंह का कहना था कि हमारे देश की अपेक्षा 8-9 प्रतिशत की दर से बढ़ना है, लेकिन सकल घरेलू उत्पाद का 5 प्रतिशत से 4.5 प्रतिशत तक की तीव्र गिरावट चिंताजनक है! खबर है कि.... सिंह का कहना था कि आज ऐसा कोई नहीं है जो मंदी और इसके खतरनाक नतीजों से इंकार कर सकें.

जीडीपी का गिरना चिंता का विषय है. हमें देश को डर के माहौल से निकाल कर भरोसे के माहौल में ले जाना होगा. हमारा आपसी विश्वास का सामाजिक ढांचा अब तहस-नहस हो चुका है. कई व्यवसायी मुझे बताते हैं कि वो डर के माहौल में जी रहे हैं कि उन्हें प्रताड़ित किया जा सकता है. इन सबका कारण सरकार की नीतियां हैं. मोदी सरकार सबको शक की नजर से देखती है. पहले की सरकारों के सब फैसलों को गलत मानकर चलती है. सिंह का मानना है कि सरकार को भारत के किसानों, व्यवसायी और नागरिकों को विश्वास की नजर से देखना होगा. यही नहीं, उनका तो यह भी कहना है कि पूर्ण बहुमत और तेल के कम अंतरराष्ट्रीय दाम, बेहतर मौके थे,

जो कई जेनरेशन में एक बार मिलते हैं, सरकार को इसका फायदा उठाना चाहिए था? बहरहाल, देश की आर्थिक व्यवस्था लगातार मंदी की ओर बढ़ रही है, यदि समय रहते अहंकार को छोड़ कर पूर्व प्रधानमंत्री सिंह जैसे इस क्षेत्र के अनुभवी विशेषज्ञों की राय नहीं ली गई, तो आगे आर्थिक हालात सुधारना मुश्किल हो जाएगा! याद रहे, पीएम मोदी सरकार के नोटबंदी से लेकर जीएसटी तक के सारे निर्णय अर्थव्यवस्था को सुधारने के बजाए अर्थव्यवस्था को मंदी की ओर धकेलनेवाले ही साबित हुए हैं?

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