भगंदर, नाम से ही लगता है कोई बड़ी बीमारी होगी. एक मामूली फोड़े से बढ़ कर भयंकर दर्द देने वाली बीमारी, जो कि किसी को भी हो सकती है. इस बीमारी को फिस्टुला भी कहते हैं. गुदा नली में पस जमा होने के कारण भगंदर जानलेवा दर्द दे सकता है. इस बीमारी को ऐसे समझें कि हमारे कुछ नाजुक अंग या नस जो आपस में जुड़े नहीं होते, उन्हें यह जोड़ देता है. जैसे आंत को त्वचा से, योनि को मलाशय से. आगे की स्लाइड में जानें, भगंदर के लक्षण, कारण, बचाव और इलाज के बारे में: 

फिस्टुला में सबसे आम होता है- एनल फिस्टुला यानी भगंदर. यह छोटी नली की तरह होता है, जो आंत के अंतिम हिस्से को गुदा के पास की त्वचा से जोड़ देता है. गुदा नली में पस जमा होने के कारण कई बार ऑपरेशन की जरुरत पड़ जाती है. 
भगंदर के लक्षण: 
गुदा में बार-बार फोड़े होना
गुदा के आसपास दर्द और सूजन 
शौच करने में दर्द
मलद्वार से रक्तस्नाव
बुखार लगना, ठंड लगना और थकान होना
कब्ज होना, मल नहीं हो पाना
गुदा के पास से बदबूदार और खून वाली पस निकलना 
बार-बार पस निकलने के कारण गुदा के आसपास की त्वचा में जलन

बचाव

अगर कभी आपको गुदा द्वार के पास फुंसी, फोड़ा वगैरह हो चुका है तो भगंदर से बचने के लिए आपको सावधानियां बरतनी चाहिए.
कब्ज या सूखे मल की स्थिति में पर्याप्त मात्रा में फाइबर लें.
तरल पदार्थ/पेय का ज्यादा सेवन करें. शराब और कैफीन पीने से बचें.
शौच को रोकें नहीं. बहुत जरुरी हो तो भी ज्यादा देर तक न रोकें. 
पाचन तंत्र फिट रखने के लिए रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें.
शौच करने में पर्याप्त समय लें. न बहुत हड़बड़ी करें और न ही बहुत ज्यादा देर तक बैठे रहें. 
मल द्वार को साफ और सूखा रखें. शौच के बाद अच्छे से सफाई करें. 

फिस्टुला का परीक्षण

कुछ फिस्टुला का पता लगाना आसान होता है और कुछ का कठिन. कभी-कभी यह खुद ठीक हो जाता है तो कभी-कभी ठीक होने के बाद फिर से हो जाता है. 
इसका पता लगाने के लिए डॉक्टर मलद्वार से रिसाव और रक्तस्त्राव के लक्षणों की जांच करते हैं.
इसका पता लगाने के लिए कोलोनोस्कोपी  की भी जरुरत पड़ सकती है.
इसमें आपके गुदा में एक कैमरे वाली ट्यूब डाली जाती है, गुदा और मलाशय का भीतरी हिस्सा देखा जाता है. 
इलाज
भगंदर के लिए सर्जरी की आवश्यकता होती है. डॉक्टर भगंदर की नली की त्वचा और आसपास की मांसपेशियों में एक चीरा लगाते हैं और फिर पस निकाला जाता है.
स्थिति ज्यादा बिगड़ी हुई हो तो डॉक्टर भगंदर के छेद में एक ट्यूब डालते हैं, जो कि सेटन संक्रमित तरल पदार्थ को सोखने का काम करती है. इसमें डेढ़ महीने या उससे ज्यादा समय भी लग जाता है. 
 

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