नई दिल्ली. पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद ने 14 फरवरी की पुलवामा हमले के बाद कुछ और हमलों की योजना बनाई थी. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के अनुसार, आतंकी समूह ने दिल्ली में विशेष रूप से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में टोह ली. यह दावा 16 सितंबर को दिल्ली की एनआईए कोर्ट के सामने पेश की गई चार्जशीट का हिस्सा हैं, जिसमें जैश के आतंकियों सज्जाद अहमद खान, तनवीर अहमद गनी, बिलाल अहमद मीर और मुजफ्फर अहमद भट के खिलाफ आरोपत्र दायर किए गए हैं.

खान को मार्च में पुरानी दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था और उसने कथिततौर पर दक्षिण ब्लॉक और केंद्रीय सचिवालय जैसे महत्वपूर्ण सरकारी सुविधाओं के पास और दिल्ली के सिविल लाइंस, बीके दत्त कॉलोनी, कश्मीरी गेट, लोधी एस्टेट, मंडी हाउस, दरियागंज और गाजियाबाद जैसे क्षेत्रों में टोह ली थी. सज्जाद अहमद खान की गिरफ्तारी के बाद अन्य तीन की गिरफ्तारी हुई थी.

चार्जशीट के अनुसार, चारों कथिततौर पर मुदस्सिर अहमद के संपर्क में थे, जिसे पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड बताया जाता है. जम्मू और कश्मीर के त्राल में 10 मार्च को अहमद की हत्या कर दी गई थी. जैश ने पुलवामा हमले की जिम्मेदारी ली थी, जिसमें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के 40 जवानों की मौत हो गई थी. इस आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट स्थित जैश के आतंकी शिविर पर हवाई हमले किए थे. इसके बाद दोनों देशों के संबंध चरम तनावपूर्ण हो गए थे और वे युद्ध की कगार पर पहुंच गए थे.

एनआईए की चार्जशीट में यह भी विस्तृत रूप से बताया गया है कि जैश का कमांडर अहमद कैसे आतंकी समूह के अन्य सदस्यों और पाकिस्तान में बैठे उसके संचालकों के साथ संपर्क में था. वे कथित तौर पर अमेरिका में जनरेट किए गए 'वर्चुअल मोबाइल नंबर' के जरिए पाकिस्तान में बैठकर पूरे भारत में हमले की योजना बनाते थे. चार्जशीट के अनुसार, अपने सहयोगियों को निर्देश देने के लिए अहमद ने मैसेजिंग सर्विस व्हाट्सएप पर पंजीकृत दो वर्चुअल मोबाइल नंबर (+19046063123 और +19042990636) का इस्तेमाल किया.

वर्चुअल मोबाइल नंबर एक सर्वर के माध्यम से काम करते हैं, जिसके लिए यूजर को अपने स्मार्टफोन पर एक ऐप डाउनलोड करके साइन अप करना होता है. फिर नंबर का उपयोग व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर और ई-मेल का इस्तेमाल करने के लिए साइन अप करके किया जा सकता है. सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि आतंकवादियों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए इन वर्चुअल नंबरों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है क्योंकि सिम पाने के लिए भारत में फोटो आईडी अनिवार्य कर दिए गए हैं. नई मोडस ऑपरेंडी के बारे में चार्जशीट में विस्तार से बताया गया है.

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