महराजगंज. मिट्टी की सामाग्री बनाने वाले कुम्हारों को हुनरमंद बनाने की पहल की जाएगी. माटीकला समन्वित विकास कार्यक्रम के तहत कुम्हारों को टूलकिट के रूप में मॉडर्न चाक प्रदान की जाएगी तथा उनके आय को बढ़ाते हुए जीवन स्तर को सुधारा जाएगा.

शासन ने समाज में मिट्टी की सामाग्री को प्रचलन में लाकर बढ़ावा देने तथा पॉलीथिन को नियंत्रित करने को लेकर पहल प्रारंभ की है. स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित कर कुम्हारों के विकास के लिए माटीकला टूलकिट वितरण योजना के तहत उन्हें कुम्हारी कला से जुड़ी सामाग्री देने की व्यवस्था बनाई गई है. योजना के लाभ के लिए माटीकला बोर्ड द्वारा निर्धारित प्रारुप पर आवेदन लिया जाएगा तथा जिले स्तर पर सीडीओ की अध्यक्षता वाली चार सदस्यीय समिति उनका चयन करेगी. चयन के उपरांत उन्हें तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण दिया जाएगा. प्रशिक्षण के उपरांत उन्हें टूलकिट प्रदान करते हुए उनकी आय बढ़ाने की भी पहल की जाएगी. जिला ग्रामोद्योग अधिकारी रोशनलाल पुष्कर ने बताया कि कुम्हारों से जल्द ही आवेदन लेने की प्रक्रिया प्रारंभ होगी.

चयन के लिए यह पात्रता होगी आवश्यक

कुम्हारों को टूलकिट वितरण करने के लिए चयन करने के दौरान समिति को इस बात का ध्यान रखना होगा कि आवेदक पंरपरागत कारीगर हो, उसकी उम्र 18 से 55 वर्ष के बीच हो, उत्तर प्रदेश का मूल निवासी हो, माटीकला के किसी विधा के प्रशिक्षित अथवा प्रमाण पत्र प्राप्त हो, परंपरागत कारीगर परिवार के शिक्षित बेरोजगार हो आदि.

बेचने पर होगी कार्रवाई

शासन का निर्देश है कि टूलकिट प्राप्त करने के बाद यदि कोई कुम्हार उसका प्रयोग नहीं करता है तथा किसी दूसरे को देता है तो उससे टूलकिट वापस ले लिया जाएगा तथा बेचने की दशा में उसकी धनराशि लाभार्थियों से वसूली जाएगी.

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