मोबाइल फोन पर बात करना जल्द ही और महंगा हो सकता है. मोबाइल कॉल दर में 20 से 25 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है. ऐसा दूरसंचार कंपनियों से समायोजित एकल राजस्व (एजीआर) वसूली प्रक्रिया शुरू होने से हो सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियां एजीआर का बोझ मोबाइल उपभोक्ताओं पर डालेंगी जिससे कॉल की दर में एक बार फिर से बढ़ोतरी होगी. 

सूत्रों के अनुसार, दूरसंचार विभाग एयरटेल, वोडा-आइडिया समेत तमाम एजीआर बकाया रखने वाली कंपनियों से वसूली की तैयारी कर रहा है. जल्द ही इन कंपनियों को एजीआर चुकाने के लिए पत्र भेजा जा सकता है. गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने दूरसंचार कंपिनयों को  24 जनवरी तक 1.47 लाख करोड़ रुपये का एजीआर भुगतान करने का आदेश दिया था.

इसके बाद कंपनियों ने एक बार फिर से उच्चतम न्यायालय का रुख किया था और रकम चुकाने में मोहलत देने की मांग की थी. उच्चतम न्यायालय भी सुनवाई को राजी हो गया था लेकिन यह नहीं कहा था कि वह एजीआर का बकाया का भुगतान नहीं करे.

दूरसंचार विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अगर इस सप्ताह पर सुनवाई नहीं होती है तो एजीआर वसूली के लिए पत्र भेजने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. दूसरसंचार विभाग के अनुसार, 15 कंपनियों पर एजीआर बकाया है. हालांकि, उनमें से कई कंपनियां या तो बंद हो चुकी है या भारतीय बाजार से अपना करोबार समेट चुकी हैं. 

25 फीसदी तक की बढ़ोतरी संभव 

दूरसंचार विशेषज्ञों का कहना है कि एजीआर का भुगतान करने के लिए मोबाइल कंपनियां रिचार्ज शुल्क में 25 फीसदी तक की बढ़ोतरी कर सकती है. यह दो महीने के अंदर दूसरी बढ़ोतरी हो सकती है. 1 दिसंबर, 2019 से कंपनियों ने अपने बिल में 50 फीसदी तक की बढ़ोतरी की थी.

साथ ही कई तरह के छूट को भी खत्म किए थे. अगर कंपनियां टैरिफ बाउचर में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी करती हैं तो इससे उन्हें अगले 3 सालों में 35 हजार करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद जताई जा रही है. 

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