कोरोना वायरस. इस वक्त सबसे ज्यादा आर्थिक तनाव में गरीबी रेखा से ऊपर और अमीरी रेखा से नीचे वाले मध्यम वर्ग के लोग हैं. ऐसे लाखों परिवारों के पास सप्ताहभर घर चलाने का पैसा तक नहीं है और इस माहौल में न ही कहीं से मिलने की उम्मीद है. घरबंदी की स्थिति में इन्हें खाने-पीने का सामान खरीदने के अलावा पानी-बिजली के बिल के भूगतान, लोन की ईएमआई, टीवी कनेक्शन, मोबाइल रिचार्ज सहित अनेक छोटे-मोटे खर्चों की चिंता सता रही है.

कोरोना संकट की इस घड़ी में किसी भी सरकार की ओर से इस वर्ग की सुरक्षा के लिए कोई घोषणा नहीं की गई है. इन हालात में जब तक कोरोना संकट से मुक्ति नहीं मिल जाती है तब तक के लिए इस मध्यम वर्ग को आर्थिक तनाव से मुक्ति और सुरक्षा के नजरिए से प्रत्येक बैंक एकाउंट में औसतन पन्द्रह हजार रुपए प्रतिमाह का पर्सनल लोन या सीसी लिमिट दी जानी चाहिए, जो देश में कामकाज सामान्य होने पर बैंक द्वारा न्यूनतम ब्याज दर के साथ वापस लिया जा सकता है.

आर्थिक जानकारों का मानना है कि वैसे भी देश में कामकाज पूरी तरह से ठप्प है, लिहाजा बैंकों में पड़ा पैसा आने वाले समय में बैंकों के लिए ही परेशानी का सबब बनेगा, इसलिए बेहतर है कि मध्यम वर्ग के लिए इसका सद्उपयोग किया जाए! सियासी सयानों का मानना है कि.... हर खाते में 15 लाख तो दूर, 15 हजार रुपए भी नहीं आने हैं, लेकिन यदि 15 हजार रुपए उधार भी मिल जाएं तो घरबंदी का समय मध्यम वर्ग शांति से काट लेगा?

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