दुष्टों के विनाश के लिए मां भगवती ने अनेक रूप धारण किए हैं. दुर्गा ने अपनी अठारह भुजाओं में खेटक, घंटा, धनुष, ध्वज, डमरू, पाश, शक्ति, मुग्दर, शूल, ढाल, तलवार, परशु, बाण, अंकुश, वज्र, चक्र, शंख और गदा धारण किया हुआ है.

मां के प्रमुख अस्त्रा इस प्रकार हैं-

शंखः- देवी के हाथों में विराजमान शंख राक्षसों और दुष्टों के प्रति युद्ध का उद्घोष करता है. मां के शंख की गर्जना से बड़े से बड़े दैत्य भी भयभीत हो जाते हैं.

चक्रः- मां के हाथों में विराजित चक्र इंद्रियों पर नियंत्राण का प्रतीक है अर्थात् इंद्रियांे को वश में करके संयमित आचरण और सदाचारपूर्ण जीवन का निर्वाह करना.

गदाः- मां दुर्गा गदा के एक ही प्रहार से चंड-मुंड जैसे भयंकर राक्षसों का वध करके सत्य की स्थापना करती है.

पदम्ः- धर्म स्थापन और जगत में शांति का प्रतीक कमल मां के कृपा पात्रों के लिए शुभ चिन्ह है.

त्रिशूलः- त्रिशूल मां की शक्ति का प्रतीक है. मां जब रौद्र रूप धारण करती है, तब दुष्टों और अत्याचारी राक्षसों पर त्रिशूल का प्रहार करके उन्हें मुक्ति प्रदान करती है.

शक्तिः- देवी के एक हाथ में स्थित नाग शक्ति इस बात का प्रतीक है कि जीवन में अहित करने वालों को नियंत्राण में रखा जा सके.

तलवारः- देवी की तलवार सत्य मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है, अर्थात् सत्य का मार्ग अपनाने पर तलवार की धार से गुजरना होता है.

ध्वजः- सत्य और धर्म की विजय का प्रतीक ध्वज मां के हाथों में शोभायमान है.

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