विवाह एक पवित्र संस्कार है. शास्त्रों में भी गृहस्थाश्रम को सबसे ज्यादा महत्व दिया गया है क्योंकि यह प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से सभी आश्रमों का आधार है. कुछ लोगों के विवाह में अनेक बाधाएं आती हैं. 

ज्योतिष शास्त्र इस समस्या के विभिन्न कारण मानता है. इसमें समस्याओं के साथ उनके निवारण के उपाय भी बताए गए हैं. ज्योतिष की मान्यता है कि यदि शुक्र के 12वें भाव में राहु हो तो विवाह में बाधाएं आती हैं. इस कारण विवाह में विलंब भी होता है. 

अगर कुंडली में सप्तम भाव पाप कपतरि (तीन ग्रहों से बनने वाले योग) में हो या सप्तम भाव में वक्री ग्रह हो तो चंद्र-शुक्र की युति विवाह में बाधक होती है. 

मंगल ग्रह भी विवाह में बाधा डाल सकता है. अगर उक्त कारणों से विवाह में विलंब हो रहा है या विलंब का कारण समझ में नहीं आ रहा है इस विधि से इसका निवारण करना चाहिए.

इस स्थिति में विशेष विधि से पूजन करना चाहिए. यदि जातक वर हो तो उसे दुर्गा सप्तशती का विधिवत पाठ करना चाहिए. उसे शादियों में पीले रंग से पैक किया गया सामान उपहार में देना चाहिए. इससे विवाहित जोड़ों के घर में तो सुख-शांति आती है. स्वयं के विवाह में आ रही समस्याओं का भी समाधान हो जाता है.

- अगर जातक कन्या हो और उसके विवाह में बहुत विलंब हो रहा हो तो उसे सोमवार या गुरुवार का उपवास करना चाहिए. साथ ही ग्रहों की स्थिति व दशा का आकलन कर संबंधित ग्रहों के लिए बताई गई वस्तुओं का दान करना चाहिए. 

- कन्या को पीले वस्त्र, चंदन एवं मिठाई का दान करना चाहिए. मां भगवती का पूजन भी शीघ्र व शुभ फलदायी होता है. इसके अलावा कात्यायनी जी की पूजा जाप करने से विवाह बाधा दूर होती है जातिकाओ की,. 

यदि आप अपनी किसी समस्या के लिए आचार्य पं. श्रीकान्त पटैरिया (ज्योतिष विशेषज्ञ) नि:शुल्क ज्योतिषीय सलाह चाहें तो वाट्सएप नम्बर 9131366453 पर सम्पर्क कर सकते हैं.

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


खबर : चर्चा में


************************************************************************************




Disclaimer : इस न्यूज़ पोर्टल को बेहतर बनाने में सहायता करें और किसी खबर या अंश मे कोई गलती हो या सूचना / तथ्य में कोई कमी हो अथवा कोई कॉपीराइट आपत्ति हो तो वह info@palpalindia.com पर सूचित करें। साथ ही साथ पूरी जानकारी तथ्य के साथ दें। जिससे आलेख को सही किया जा सके या हटाया जा सके ।