प्रदीप द्विवेदी. अंधे समर्थन ने आपातकाल दिया, तो अंधे समर्थन के कारण ही आज आफतकाल आया है!

किसी नेता का अंधा समर्थन ही आपातकाल का आधार बनता है, तो ऐसा ही अंधा समर्थन आज के आफतकाल का आधार है?

पीएम नरेन्द्र मोदी के एकतरफा निर्णय लेने की सियासी आदत का ही नतीजा है कि आज देश बर्बादी की ओर बढ़ रहा है!

यह नहीं भूलना चाहिए कि जिस जहाज में पीएम मोदी के हाथों जाने-अनजाने छेद हो गया है, उसी जहांज में हम सभी सवार हैं, हम सभी के परिवार सवार हैं? इसलिए आज के हालातों को कांग्रेस, बीजेपी आदि के सियासी चश्मे से नहीं देखें!

कोरोना का हमला केवल मोदी विरोधियों पर नहीं होगा, मोदी समर्थकों पर भी होगा!

देश ने पीएम मोदी को पर्याप्त समय दिया, परन्तु कोरोना संकट ने यह तो साबित कर दिया है कि प्रायोगिक धरातल पर सीएम योगी, डाॅ. हर्षवर्धन, अमित शाह जैसे नेता, पीएम मोदी के मुकाबले कई ज्यादा सक्षम हैं, कई अधिक सफल साबित हुए हैं?

पीएम मोदी ने तो रबड़ी के सपने दिखा कर राबड़ी भी नहीं दी है!

इस वक्त देश में तीन वर्ग हैं, मोदी समर्थक, मोदी विरोधी और परेशानवर्ग?

मोदी समर्थकों को न तो सड़क पर चलते मजदूर नजर आ रहे हैं, न परेशान मध्यमवर्ग दिखाई दे रहा है और न ही नमस्ते ट्रंप जैसी कोरोना लापरवाही नजर आ रही है?

मोदी विरोधी, बयानबाजी को ही जनसेवा मान रहे हैं!

सबसे ज्यादा कष्ट में है- परेशानवर्ग? इसमें गरीब भी हैं, मध्यमवर्गी भी हैं और अमीर भी हैं!

हर वर्ग में एक क्रीमी लेयर है, जिसके लिए सरकार ने लाखों करोड़ रुपयों का पहेली पैकेज दिया है, परेशानवर्ग तो केवल उसके जीरो गिन रहा है?

कुछ लोग कागजों में गरीब हैं, उनके बैंक खातों पर केन्द्र सरकार मेहरबान है, वेतन पाने वालों को भले ही आधा वेतन मिले, ईश्वर के आभारी हैं, तो असली अमीर- बड़े आराम से, हैं!

परेशान वर्ग में वे असली गरीब हैं, जिनके पास गरीब होने का कोई सरकारी कागज नहीं है, वे मध्यमवर्गी हैं, जिनकी नौकरी नहीं रही, जिनकी दुकान बंद है, जिनका कामकाज बंद है, आय शून्य है, लेकिन किराया चल रहा है, फीस भर रहे हैं, बिजली-पानी के बिल भर रहे हैं, बैंक लोन कट रहा है, परन्तु घर में आटा घट रहा है और आगे खरीदने के पैसे नहीं हैं?

जो लोग आराम में हैं, वे परेशानवर्ग को देशप्रेम का पाठ पढ़ा रहे हैं!

अमीर वर्ग में जिनका कारोबार अपने पैसे से चल रहा है, थोड़ा ठीक हैं, किन्तु जिनका कारोबार उधारी पर चल रहा है, वे दोधारी तलवार पर हैं, कर्ज भी चुकाना है और घर भी चलाना है?

जाहिर है, इन हालात के लिए बीजेपी जिम्मेदार नहीं है, पीएम मोदी के एकतरफा फैसले जिम्मेदार हैं और यह अब सामने भी आ चुका है, लिहाजा सबसे पहले नेतृत्व परिवर्तन की जरूरत है, इसके लिए योगी, डाॅ. हर्षवर्धन, अमित शाह जैसे किसी सक्षम नेतृत्व को देश की जिम्मेदारी देनी होगी!

यदि ऐसा नहीं होता है, तो देश को जितना नुकसान होगा, उससे कई ज्यादा नुकसान बीजेपी का होगा, अटल-आडवाणी की वर्षों की तपस्या पर पानी फिर जाएगा?

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