पाताल लोक सिरीज के लेखक सुदीप शर्मा हैं, जो इससे पहले एनएच 10 और उड़ता पंजाब जैसी फिल्मों की स्क्रिप्ट लिख चुके हैं. संवादों में पैनापन है. किरदारों ने हरियाणवी और बुंदेलखंडी लहजों को पकड़ा भी सटीक ढंग से है. कुछ-कुछ जगहों पर कहानी की रफ्तार धीमी पड़ती है, पर जल्द ही संभल जाती है. कहानी में रफ्तार और रोमांच की खुराक तो जबर्दस्त है. हां, सिरीज में कुछ बिंदुओं पर नएपन की कमी जरूर अखरती है. क्लाईमैक्स भी बहुत प्रभावित नहीं करता.

कहानी- दिल्ली के आउटर जमना पार थाने में तैनात इंस्पेक्टर हाथीराम (जयदीप अहलावत) पिछले 15 साल से प्रमोशन की राह देख रहे हैं. उन्हें इंतजार है एक ऐसे केस का, जिसके जरिये उन्हें अपने नंबर बढ़वाने का मौका मिल सके. अचानक एक दिन शहर के मशहूर टीवी एंकर संजीव मेहरा (नीरज काबी) की हत्या की साजिश के जुर्म में चार आरोपियों- हथौड़ा त्यागी उर्फ विशाल त्यागी (अभिषेक बनर्जी), तोप सिंह उर्फ चाकू (जगजीत संधु) कबीर एम. (आसिफ खान) और मैरी लिंग्डो उर्फ चीनी (मेरेम्बम रोनाल्डो सिंह) को हाथीराम के थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया जाता है. केस सुलझाने का जिम्मा उन्हें मिलता है. हाथीराम ने अपनी जांच शुरू ही की होती है कि यह केस सीबीआई को दे दिया जाता है और हाथीराम को सस्पेंड कर दिया जाता है. 

अविनाश अरुण और प्रोसित रॉय का निर्देशन भी कसा हुआ है. अविनाश अरुण और सौरभ गोस्वामी की सिनेमेटोग्राफी सिरीज को बेहद विश्वसनीय बनाती है.  

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