इन दिनों पूरी दुनिया को COVID 19 (कोरोना वायरस) ने अपनी चपेट में लिया हुआ है। यह जानलेवा वायरस वुहान वायरोलॉजी लैब से पूरी दुनिया में फैला है। यह बात सामने आने पर भारत में ऑनलाइन अभियान चलाए जा रहे हैं जिनमें लोगों से चीनी इलेक्ट्रॉनिक्स पर निर्भरता कम करने और उन्हें खरीदने से परहेज करने को कहा जा रहा है। आज हम आपको बताएंगे कि यह चीनी कम्पनियां किन तरीकों के जरिए भारतीयों को गुमराह करते हुए अपने गैजेट्स सबसे ज्यादा भारत में ही बेचती हैं।

लाइव मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक बहुत से चाइनीज़ ब्रांड्स अपने स्मार्टफोन या अन्य प्रोडक्ट्स को बेचने के लिए मेक इन इंडिया कैंपेन का सहारा लेते हैं। इसके अलावा लोकल सेलिब्रिटीज़ से गैजेट की प्रमोशन करवाई जाती है। वहीं लोकप्रिय क्रिकेट टूर्नामेंट जैसे कि IPL को स्पोंसर भी किया जाता है। इन प्रोडक्ट्स की कीमत भी कम मार्जिन पर ही रखी जाती है, ताकि अन्य कम्पनियों के प्रोडक्ट्स इनके सामने टिके ही ना। बहुत सी कम्पनियां तो यह भी कहती हैं कि ये फोन भारत में असेंबल किए गए हैं और उनके कम्पोनेंट्स चाइना से इम्पोर्ट हुए हैं।

लेकिन सवाल खड़ा होता है कि वर्ष 2019 के चौथे क्वार्टर में 70 प्रतिशत स्मार्टफोन्स की ही शिपमेंट्स भारत में की गई थीं। यह डाटा इंटरनैशनल डाटा कोर्पोरेशन (IDC) का है। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि क्या ये सारे फोन भारत में बनते है जिनपर मेड इन इंडिया लिखा होता है?

यह पहली बार नहीं है जब भारत में बॉयगोट चाइना का अभियान चलाया जा रहा है। इससे पहले वर्ष 2014 में इंडियन एयरफोर्स द्वारा शाओमी के फोन इस्तेमाल करने बंद किए गए थे। इसकी वजह यह थी कि सिक्योरिटी कम्पनी F-सिक्योर ने कहा था कि शाओमी के फोन्स लोगों की डिटेल्स जैसे कि फोन नम्बर्स, IMEI नम्बर्स और ऑपरेटर का नाम चीन में पड़े रिमोट सर्वर पर भेजते हैं। इसके बाद योग गुरु बाबा रामदेव ने भारतीयों से चीनी उत्पादों का बहिष्कार करने का आग्रह किया था।

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