पेइचिंग. लद्दाख में वास्‍तविक नियंत्रण रेखा पर हजारों सैनिकों को तैनात करने के बाद भी अपने मंसूबों में कामयाब न होता देख चीनी ड्रैगन ने एक बार फिर से भारत को बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का लालच दिया है. चीन के सरकारी समाचार पत्र ग्‍लोबल टाइम्‍स ने कहा कि BRI भारत के लिए आर्थिक विकास के अवसरों के दरवाजे खोल सकती है. पाकिस्‍तान के कब्‍जे वाले गिलगित-बालटिस्तान से होकर गुजरने वाले BRI का भारत पुरजोर विरोध करता रहा है.

ग्‍लोबल टाइम्‍स ने अपने एक लेख में कहा, भारत का लंबे समय तक आर्थिक विकास चीन के प्रस्‍तावित BRI प्रॉजेक्‍ट के अनुरूप ही है. बीआरआई का उद्देश्‍य देशों और क्षेत्र का साझा विकास है. इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर के विकास के लिए निवेश से बीआरआई भारत को बड़ा मौका दे सकता है जिसे विदेशी निवेश आकर्षित करने और औद्योगिक विकास के लिए इस निवेश की सख्‍त जरूरत है.

चीन के सरकारी समाचार पत्र ने कहा, भारत की अर्थव्‍यवस्‍था ने पिछले वर्षों में बहुत तेजी आई है लेकिन कमजोर इंफ्रास्‍क्‍ट्रक्‍चर इसके विकास में एक बड़ी बाधा बना हुआ है. वर्ष 1991 से भारत ने कई आर्थिक सुधार किए हैं लेकिन देश में अभी भी वित्‍तीय संकट, व्‍यापार घाटा और महंगाई बनी हुई है. BRI भारत में इंफ्रा के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश ला सकता है लेकिन नई दिल्‍ली ने BRI में शामिल होने के प्रति अनिश्चित रवैया अपना रखा है.

ग्‍लोबल टाइम्‍स ने लिखा कि कोरोना वायरस महासंकट के बीच दुनिया के देश आर्थिक विकास दर को फिर से हासिल करना चाहते हैं. हिंद महासागर के आसपास का इलाका बीआरआई के लिए बेहद अहम है. भारत ऐतिहासिक और सांस्‍कृतिक रूप से इस इलाके में महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा करता रहा है. भारत के पास अब इसे फिर से शुरू करने का बड़ा मौका है.

चीनी सरकारी समाचार पत्र ने भारत को राजनयिक संबंधों के 70 साल पूरे होने की भी याद दिलाई. ग्‍लोबल टाइम्‍स ने लिखा, दो प्राचीन सभ्‍यता और दो सबसे बड़े विकासशील देशों चीन और भारत के बीच आपसी संवाद और रणनीतिक सहयोग के लिए व्‍यापक क्षमता है. कोरोना वायरस को देखते हुए भारत अर्थव्‍यवस्‍था संकट में जा सकती है, इसको देखते हुए भारत को बड़े पैमाने पर आर्थिक सुधार की जरूरत है. साथ ही भारत को अपनी आर्थिक कूटनीति में और बड़े आर्थिक सामंजस्‍य करने होंगे.

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