पटना. बिहार में प्रवासी श्रमिकों के बड़ी संख्या में आने के कारण कानून एवं व्यवस्था के बारे में जिलों को सतर्क किए जाने के संबंध में एक शीर्ष पुलिस अधिकारी की चिट्टी पर सियासी बवाल शुरू हो गया है. इस चिट्टी को लेकर राज्य की नीतीश कुमार सरकार को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है.

विपक्ष ने इसे श्रमिकों का अपमान बताया है. राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने बिहार पुलिस मुख्यालय की चिट्टी को होर्डिंग पर छपवा कर अपने पार्टी दफ्तर के बाहर लगवा दिया है.

चिट्टी को लेकर राजद ने नीतीश कुमार द्वारा बिहार के गरीबों-श्रमिकों को गाली देने और उन्हें अपराधी बताए जाने पर हमला बोला है. बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सभी कार्यकर्ताओं से आह्वान किया है कि श्रमिकों का अपमान करने वाली इस निर्दयी सरकार के विरुद्ध हर गली-मोहल्ले, टोले, पंचायत, प्रखंड और जि़लास्तर पर इस अमानवीय चिट्टी के बैनर, पोस्टर और होर्डिंग लगाकर नीतीश कुमार और सुशील मोदी की गरीबों के प्रति घृणित सोच को उजागर करें.

राजद ने पूछा, नीतीश कुमार बताएं उन्हें बिहारी श्रमिक गुंडे क्यों दिखे? उन्हें श्रमवीर अपराधी क्यों लगे? उन्होंने मजदूर भाईयों को लुटेरा क्यों कहा? श्रमिकों को रोजगार से इनकार क्यों किया? बेरोजगारों का अपमान क्यों किया? राजद ने आगे लिखा, नीतीश कुमार शर्म करो, श्रमिकों को सम्मान नहीं दे सकते तो अपमान क्यों?

नीतीश कुमार द्वारा बिहार के गऱीबों और श्रमिकों को गाली देने और उन्हें अपराधी बताने वाली अपमानजनक अमानवीय चिट्टी के होर्डिंग को पटना में नेता प्रतिपक्ष ने स्वयं लगाया. 

यह है पूरा मामला

बता दें कि 29 मई को अपर पुलिस महानिदेशक एडीजी (कानून एवं व्यवस्था) अमित कुमार ने एक पत्र जारी किया था और 4 जून को एक पत्र के जरिए इस पत्र को अब वापस ले लिया गया है. दूसरे पत्र में कहा गया है कि पिछला पत्र भूलवश जारी किया गया था. पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गुप्तेश्वर पांडे ने स्थिति को संभालने का प्रयास करते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये मीडिया को बताया कि सरकार का प्रकरण से कोई लेना-देना नहीं है. बहरहाल, पत्रों की प्रतियां सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं, जिसके बाद विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा. राजद नेता तेजस्वी यादव ने दावा किया कि पत्र से पता चलता है कि सरकार श्रमिक और मानव जीवन की गरिमा में विश्वास नहीं करती है.

वह लंबे समय से प्रवासियों के साथ ऐसा व्यवहार कर रही है जैसे कि वे अपने गृह राज्य में द्वितीय श्रेणी के नागरिक हो. यादव ने पूछा, तो, क्या सरकार अब मानती है कि प्रवासियों का आर्थिक पुनर्वास असंभव है? यदि ऐसा है, तो वह उन्हें झूठे वादों के साथ दिन-प्रतिदिन गुमराह कर रही है.

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