नयी दिल्ली. केंद्र सरकार ने खनिज संसाधनों वाले सभी राज्यों को कम से कम पांच ऐसी नयी खनन परियोजनाओं की नीलामी के लिये पहचान करने को कहा है, जिनके लिये सारी मंजूरियां पहले से दी जा चुकी हों. केंद्र सरकार ने खनिज खंडों की बिक्री की प्रक्रिया को तेज करने और इन्हें जल्द से जल्द परिचालन में लाने के मद्देनजर यह निर्देश दिया है. खान मंत्रालय ने वन व पर्यावरण जैसी विभिन्न मंजूरियों के कारण खनिज के उत्पादन में देरी की मुख्य वजहों को दूर करने के तरीके तलाशने के तहत पहले से मंजूरी प्राप्त खनिज खंडों की नीलामी को लेकर नये दिशानिर्देश जारी किये हैं. पहचाने गये ऐसे खनिज खंडों की नीलामी उन खनिज खंडों के साथ की जायेगी, जिन्हें पहले से मंजूरियां प्राप्त नहीं हैं.

दिशानिर्देशों के तहत, केंद्र ने राज्यों से अपेक्षित निगरानी, अनुमोदन और संबंधित कार्य प्राप्त करने का प्रारंभिक कार्य पूरा करने के लिये एक परियोजना निगरानी इकाई (पीएमयू) स्थापित करने को कहा है. खनन परियोजना शुरू करने के लिये यह इकाई सभी मंजूरी प्राप्त करेगी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रोत्साहन पैकेज के तहत पिछले महीने खनन क्षेत्र में विभिन्न संरचनात्मक सुधारों की घोषणा की थी. उन्होंने 500 खनिज खंडों की नीलामी और एक सहज समग्र अन्वेषण-सह-खनन-सह-उत्पादन व्यवस्था की शुरुआत की घोषणा की थी.

खान मंत्रालय ने खनिज खंडों की नीलामी को लेकर दिशानिर्देशों में कहा, “यह निर्णय लिया गया है कि राज्यों को तेजी से नीलामी के लिये ऐसे खनिज खंडों की पहचान करनी चाहिये, जिन्हें पूर्व-अंतर्निहित मंजूरी के साथ नीलाम किया जा सकता है. प्रत्येक राज्य को नीलामी के लिये इस तरह के कम से कम पांच खनिज खंडों की पहचान करनी चाहिये.”

मंत्रालय ने कहा, ‘‘पूर्व-अंतर्निहित मंजूरी के साथ वाले इन पहचाने गये खनिज खंडों को बिना पूर्व मंजूरी वाले अन्य खनिज खंडों के साथ नीलाम किया जा सकता है. प्रायोगिक आधार पर पहचाने गये इन खनिज खंडों की नीलामी से प्राप्त अनुभव के आधार पर, इस अवधारणा को मुख्यधारा में लाने की दिशा में अन्य कदम उठाये जायेंगे.” मंत्रालय ने कहा कि नीलामी में चुने गये बोलीदाता को खनन पट्टों पर हस्ताक्षर करने से पहले पर्यावरणीय मंजूरी (ईसी) और वन मंजूरी (एफसी) सहित 20 से अधिक मंजूरियां प्राप्त करनी होती है. यह अक्सर खनिज उत्पादन शुरू करने में देरी का कारण बनता है. मंत्रालय ने कहा, “खनन कार्य शुरू करने के लिए आवश्यक सभी मंजूरी के लिये परियोजना निगरानी इकाई (पीएमयू) आवेदक बन जायेगा.”

उसने कहा कि 2015 से अब तक नीलामी के माध्यम से अब तक 95 खनन पट्टों का आवंटन किया गया है. हालांकि, यह देखा गया है कि विभिन्न प्रक्रियाओं के शामिल होने के कारण, खानों से उत्पादन परिचालित करने में लगने वाला समय लंबा खिंच जाता है. इस संबंध में प्रमुख चुनौती केंद्र और राज्य सरकारों के विभिन्न प्राधिकारियों से सफल बोलीदाता द्वारा वैधानिक मंजूरी प्राप्त करने में शामिल वर्तमान प्रक्रियात्मक प्रक्रियाओं को गति देना है. मंत्रालय ने कहा कि उसने जल्द से जल्द उत्पादन सुनिश्चित करने के लिये मंजूरी प्राप्त करने में लगने वाले समय को कम करने के तरीकों की समीक्षा की.

मंत्रालय ने एक प्रमुख नीतिगत हस्तक्षेप के रूप में हाल ही में खनिज कानून संशोधन अधिनियम 2020 के माध्यम से एमएमडीआर अधिनियम 1957 में संशोधन किया है. उसने कहा, “इससे कारोबारी माहौल सुधरेगा और देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में खनन क्षेत्र के योगदान में सुधार होगा.”

मंत्रालय ने कहा कि भूमि अधिकार प्राप्त करना एक अन्य समय लेने वाली प्रक्रिया है. इसलिये पीएमयू को सरकार के साथ-साथ निजी स्वामित्व वाली भूमि के मामले में भी खनन के लिये भूमि अधिकार मिलना चाहिये. मंत्रालय ने कहा कि राज्य सरकार को खनन कार्यों को शुरू करने के लिये अन्य सभी मंजूरियों पर भी अमल करना चाहिये. इन मंजूरियों को सफल बोलीदाता को मूल रूप से हस्तांतरित किया जायेगा, ताकि खनन कार्य बिना किसी देरी के शुरू हो जाये.

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