नजरिया. लंबे इंतजार के बाद मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान सरकार का नया मंत्रिमंडल तो बन गया, लेकिन इसमें कई ऐसे मंत्री हैं, जो इस वक्त विधायक नहीं हैं, लिहाजा अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वे अगले उप-चुनाव में विधायक कैसे बनते हैं?

एमपी में बीजेपी की शिवराज सिंह चौहान सरकार का गुरुवार को मंत्रिमंडल विस्तार किया गया, जिसमें राजभवन में 28 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली. इन मंत्रियों के शपथ ग्रहण के साथ अब शिवराज के मंत्रिमंडल में 34 मंत्री हो गए हैं.

इस मंत्रिमंडल विस्तार में शिवराज सिंह के पिछले मंत्रिमंडल में सीनियर विधायक और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव, भूपेंद्र सिंह, यशोधरा राजे, विजय शाह ने मंत्री पद की शपथ ली, तो ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के 12 नेता भी मंत्री बने हैं, इनमें महेंद्र सिंह सिसोदिया, प्रभु राम चौधरी, प्रद्युमन सिंह तोमर, इमरती देवी, राजवर्धन सिंह, बृजेंद्र सिंह यादव, सुरेश धाकड़, गिर्राज दंडोतिया, ओपीएस भदौरिया, हरदीप सिंह डंग, बिसाहूलाल सिंह और एंदल सिंह कसाना को मंत्री बनाया गया है.

सियासी सयानों का मानना है कि इस मंत्रिमंडल विस्तार में सियासी संतुलन कायम करने की कोशिशें जरूर की गई हैं, लेकिन लगता नहीं है कि पर्दे के पीछे का सियासी असंतोष लंबे समय तक दबाया जा सकेगा!

जहां कई मंत्रियों, जो अभी विधायक नहीं है, के समक्ष चुनाव जीतने की चुनौती है, तो सीएम शिवराज सिंह के समक्ष भी चुनौतियां कम नहीं हैं? क्या हैं, ये चुनौतियां,

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