जयपुर. अन्तर्राष्ट्रीय उपभोक्ता संगठन आईकेन व देश के उपभोक्ता संगठनों की संयुक्त पहल भारतीय उपभोक्ता परिसंघ के नेतृत्वकर्ता, उपभोक्ता आन्दोलनकारी डाॅ. अनन्त शर्मा ने देश में नये उपभोक्ता कानून 2019 को उपभोक्ता हित की ठोस पहल बताया है और उपभोक्ता संगठन व इससे जुड़े प्रतिनिधियों से आव्हान किया है कि वे जिम्मेदारी से उपभोक्ता जागरूकता व हित सरंक्षण अभियान को गति देकर उपभोक्ता राहत के अभियान को प्रभावी बनायें.  

देश की अग्रणी उपभोक्ता संस्था कैंस के तत्वावधान में आयोजित डिजिटल संवाद को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कानून के विभिन्न बिन्दुओं पर प्रकाश डाला एवं इस कानून के माध्यम से मिलने वाली राहत व्यवस्थाओं से अवगत करवाया. डाॅ. शर्मा ने कहा कि केन्द्र के अनुरूप राज्य सरकारें शीध्र कार्यवाही कर कानूनी प्रावधानों का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने कार्यवाही करें ताकि उपभोक्ताओं को इस व्यवस्था का लाभ मिल सके. उन्होंने कहा कि यह एक क्रान्तिकारी पहल है, जिसका पूरा लाभ तभी मिलेगा जब इसका प्रभावी क्रियान्वयन होगा व उपभोक्ता समस्या की स्थिति में राहत हेतु आगे आयेंगे. उन्होंने कैंस की ओर से केयर कन्ज्युमर व्यवस्था लागू करने व इसके माध्यम से डिजिटल शिकायतें दर्ज करवाने कन्ज्युमर कम्प्लैंट मैकेनिज्म को अमल में लाने की घोषणा की.

उन्होंने नये कानूनी प्रावधानों को लेकर उपभोक्ता मंचों व उपभोक्ता संगठन प्रतिनिधियों के लिये उन्मुखीकरण कार्यक्रम चलाने की व्यवस्था पर भी जोर दिया. डाॅ. शर्मा ने कहा कि नये प्रावधानों के बाद अब उपभोक्ता हितों से खिलवाड़ करने वाले उत्पादकों व सेवा देने वालो पर कठोर कार्यवाही संभव होगी. इस दौरान कैंस के कार्यकारी अध्यक्ष केपी धीर, विषय विशेषज्ञ सतीश छाबड़ा, शान्ता जैन आदि ने भी विचार व्यक्त किये.

भारतीय उपभोक्ता परिसंघ के राष्ट्रीय सचिव निरंजन द्विवेदी ने बताया कि केन्द्र सरकार द्वारा गत दिनो जारी नोटिफिकेशन के बाद देश में नया उपभोक्ता कानून 2019 लागू है. उपभोक्ता हित सरंक्षण की इस पहल के बाद बाजार व्यवस्था में काफी परिवर्तन आयेगा. केन्द्र सरकार द्वारा पूर्व में बने उपभोक्ता कानून की कमियों को दूर कर इसमें बदलाव करने सुझाव लिये गये और इसे प्रभावी बनाने नया उपभोक्ता कानून बनाकर अगस्त 2019 में संसद में पेश कर पारित करवाया, जिसके क्रमशः क्रियान्वयन का अभियान प्रारम्भ हुआ है. केन्द्र की पहल के बाद राज्यस्तर पर भी इस बाबत उपभोक्ता कानून के नियमों में बदलाव की प्रक्रिया होगी.

कानून के तहत विभिन्न सेवा प्रदाताओं व वस्तुओं के उत्पादकों पर अपनी वस्तु-सेवा के मामले में कमी होने व उसके चलते उपभोक्ता को नुक्सान होने पर कार्यवाही हो सकती है व आर्थिक हर्जाना देना पड़ सकता है. अब कानून में आजीवन कारावास के कड़े प्रावधान भी शामिल हैं. उपभोक्ता कानून 2019 के प्रावधानों के तहत उपभोक्ता आयोगों की न्यायिक सीमा व आर्थिक अधिकारिता में भी परिवर्तन होगा और एक करोड़ तक के मामलों को जिला आयोग में सुना जायेगा. उपभोक्ता अपनी समस्या को लेकर अपने गृह जिले में शिकायत कर पायेगा.

उपभोक्ता कानून 2019 में उपभोक्ता सरंक्षण के महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं, नयी व्यवस्था में मध्यस्थता के माध्यम से शिकायतों व प्रकरणों के समाधान संभव होगें, जिसके लिये प्रावधानों के तहत मध्यस्थता सेल का गठन होगा. नकली माल के सम्बन्ध में बनाये गये प्रावधान भी लागू होंगे और त्रुटिपूर्ण उत्पादों को लेकर जिम्मेदारी भी बनेगी व हानि होने पर कार्यवाही संभव होगी. नया कानून बनने के बाद अब उपभोक्ता संगठनों के प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी और वे जनहित से सम्बद्ध विषयों को लेकर भी कार्यवाही कर पायेंगे.

विभिन्न स्वेच्छिक, सामाजिक व अन्य संगठनों से राष्ट्रीय स्तर पर जुड़े रमेश ओझा ने कहा कि कानूनी प्रावधान तय हो गये परन्तु उपभोक्ता को जागरूक बनना होगा तभी कानून बनाने का लक्ष्य पूरा होगा. उन्होंने कहा कि उपभोक्ता अपने हितों के संरक्षण को लेकर सक्रिय हों, समस्या होने पर उपभोक्ता कानून के नियमों के तहत कार्यवाही करें तो उसकी समस्या का समाधान व हर्जाना मिल सकता है, यह समझना होगा.

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