भोपाल. मध्य प्रदेश के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी रमेश थेटे ने मीडिया को चिट्ठी लिखकर अपने साथ शासन में रहते हुए अन्याय की जानकारी दी है. रमेश थेटे ने लिखा कि डायरेक्ट आईएएस होने के बाद भी उन्हें कलेक्टर नहीं बनने दिया गया.

उन्होंने लिखा कि मैंने आंबेडकरवादी होने की कीमत चुकाई. रिटायर होना मेरे लिए गुलामी से मुक्ति जैसा है. मैंने दलित कर्मचारियों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई तो झूठे प्रकरण में फंसा कर जेल भिजवा दिया गया. साथ ही नौकरी से बर्खास्त करवा दिया गया.

मुझ पर लगाए गए 25 झूठे केस

थेटे ने लिखा, मुझ पर 25 झूठे केस ठोके गए. कोर्ट से दोषमुक्त होने के बाद मेरी पत्नी पर केस ठोक दिया गया और मुझे सहआरोपी बना दिया गया.

उन्होंने लिखा कि मेरे पास इस बात का प्रमाण है कि जातिवादियों ने मुझे संगठित गिरोह बनाकर घेरा और घेरकर मेरा शिकार किया. अब मेरे हाथ में कलम है और छोटा-मोटा होना हुनर है. जानकारी के मुताबिक, रिटायरमेंट के बाद थेटे थिएटर फिल्म निर्माण करेंगे. मालूम हो कि रिटायरमेंट से कुछ दिन पहले उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को चि_ी लिखकर प्रमुख सचिव पद पर पदोन्नति के आदेश करने का आग्रह किया था.

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