नई दिल्ली. लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के जवानों की एक बटालियन उत्तराखंड के लिपुलेख पास के समीप तैनात की है. ध्यान रहे कि पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर कुछ हफ्तों से दोनों देशों के बीच पहले ही तनाव बना हुआ है. 15 जून को पूर्वी लद्दाख में गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों में हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे. वहीं चीन ने अपने सैनिकों के हताहत होने का कोई आंकड़ा जारी नहीं किया था.

चीनी सैनिकों की मौजूदगी बढ़ी

एक टॉप मिलिट्री कमांडर ने बताया, लिपुलेख पास, उत्तरी सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश से लगी एलएसी पर चीनी सैन्य टुकडिय़ों की मौजूदगी बढ़ी है. रिपोर्ट के मुताबिक, बॉर्डर से कुछ दूरी पर लिपुलेख पास के समीप एलएसी ने करीब 1,000 सैनिकों की एक बटालियन भेजी है. टॉप मिलिट्री कमांडर ने बताया, चीन एलएसी पर अपनी साइड इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण में लगा हुआ है. चीनी सेना लद्दाख के अलावा अन्य जगहों पर भी अपनी उपस्थिति बढ़ा रही है. इससे एलएसी पर तनाव की स्थिति बनी हुई है.

लिपुलेख पर भारत-नेपाल में विवाद

भारत ने लिपुलेख से तिब्बत में मानसरोवर तक सड़क बनाई है और नेपाल को इस पर आपत्ति है. नेपाल का कहना है लिपुलेख उसका इलाक़ा है जबकि भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि उसने अपने इलाके में सड़क बनाई है. भारत के हजारों तीर्थयात्री कैलाश मानसरोवर कई रूट से जाते हैं, लेकिन लिपुलेख रूट को छोटा बताया जा रहा है. इस रूट से जाने पर कम वक्त लगेगा. लद्दाख और अन्य जगहों पर चीनी सैनिकों की बढ़ती आवाजाही को देखते हुए भारत ने भी अपने सैनिकों को तैयार रखा है. भारत लद्दाख में सर्दियों के लिए भी तैयारी में जुट गया है.

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