मुंबई. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) भारतीय क्रिकेटरों के विदेशी टी20 लीगों की ओर बढ़ते रुझान को लेकर सख्त कदम उठाने की तैयारी में है. बोर्ड एक नई रिटायरमेंट नीति पर विचार कर रहा है, जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय, घरेलू और आईपीएल क्रिकेट से संन्यास लेने के तुरंत बाद विदेशी लीगों में खेलने वाले खिलाड़ियों पर पांच वर्ष का ‘कूलिंग-ऑफ पीरियड’ लागू किया जा सकता है. यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो संबंधित खिलाड़ी पांच साल तक भारतीय क्रिकेट व्यवस्था में किसी भी आधिकारिक भूमिका के लिए पात्र नहीं होंगे.
हाल ही में हुई बीसीसीआई एपेक्स काउंसिल की बैठक में इस विषय पर विस्तार से चर्चा की गई. बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों ने चिंता जताई कि कुछ भारतीय खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय या घरेलू क्रिकेट से जल्दी संन्यास लेकर विदेशी टी20 लीगों में खेलने को प्राथमिकता दे रहे हैं. बीसीसीआई का मानना है कि यह प्रवृत्ति भारतीय क्रिकेट और इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के दीर्घकालिक हितों के लिए चुनौती बन सकती है.
वर्तमान नियमों के अनुसार कोई भी सक्रिय भारतीय क्रिकेटर विदेशी टी20 लीगों में हिस्सा नहीं ले सकता. यह प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों के साथ-साथ घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में खेलने वाले खिलाड़ियों पर भी लागू होता है. हालांकि यदि कोई खिलाड़ी भारतीय क्रिकेट की सभी मान्यता प्राप्त प्रतियोगिताओं और आईपीएल से औपचारिक रूप से संन्यास ले लेता है, तो उसे विदेशी लीगों में खेलने की अनुमति मिल जाती है.
बीसीसीआई का मानना है कि कुछ खिलाड़ी इसी व्यवस्था का लाभ उठाकर समय से पहले संन्यास ले रहे हैं और उसके तुरंत बाद विदेशी फ्रेंचाइजी लीगों से अनुबंध कर रहे हैं. बोर्ड को आशंका है कि यदि यह प्रवृत्ति बढ़ती है तो भारतीय क्रिकेट को अनुभवी खिलाड़ियों की सेवाओं से समय से पहले वंचित होना पड़ सकता है.
इसी चिंता को देखते हुए ‘कूलिंग-ऑफ पीरियड’ का प्रस्ताव सामने आया है. रिपोर्टों के अनुसार यदि कोई खिलाड़ी संन्यास लेने के तुरंत बाद विदेशी लीग में खेलने जाता है, तो उसे भारतीय क्रिकेट व्यवस्था से कम से कम पांच वर्षों के लिए दूर रहना पड़ सकता है. इस अवधि के दौरान वह भारतीय टीम, राज्य संघों या बीसीसीआई से जुड़े किसी भी आधिकारिक पद पर नियुक्त नहीं हो सकेगा. इसमें कोच, मेंटर, सलाहकार या अन्य प्रशासनिक भूमिकाएं भी शामिल हो सकती हैं.
बोर्ड के भीतर यह भावना है कि वरिष्ठ और अनुभवी खिलाड़ियों को अपने करियर के सर्वश्रेष्ठ वर्ष भारतीय क्रिकेट और आईपीएल को देने चाहिए. अधिकारियों का मानना है कि आईपीएल दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित टी20 लीग है और उसके स्तर तथा आकर्षण को बनाए रखने के लिए खिलाड़ियों की प्रतिबद्धता आवश्यक है.
हालांकि प्रस्तावित नियम को लेकर क्रिकेट जगत में बहस भी शुरू हो गई है. कई विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ प्रतिभाशाली खिलाड़ी ऐसे होते हैं जिन्हें भारतीय टीम, घरेलू क्रिकेट या आईपीएल में पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाते. ऐसे खिलाड़ियों के लिए विदेशी लीगें अपने करियर को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन जाती हैं. ऐसे में नए नियम का प्रभाव उन खिलाड़ियों पर भी पड़ सकता है, जो बेहतर अवसरों की तलाश में विदेशों का रुख करते हैं.
बीसीसीआई फिलहाल इस प्रस्ताव के सभी पहलुओं का अध्ययन कर रहा है. बोर्ड यह सुनिश्चित करना चाहता है कि नई नीति भारतीय क्रिकेट के हितों की रक्षा करे और साथ ही खिलाड़ियों के करियर विकल्पों पर अनावश्यक प्रतिबंध भी न लगाए. इसी कारण कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं की भी समीक्षा की जा रही है.
सूत्रों के अनुसार एपेक्स काउंसिल ने इस प्रस्ताव को प्रारंभिक स्तर पर सकारात्मक संकेत दिया है, लेकिन अंतिम निर्णय अभी बाकी है. बीसीसीआई अध्यक्ष और सचिव को इस विषय पर विस्तृत अध्ययन करने तथा सभी कानूनी पहलुओं की जांच के बाद अंतिम प्रस्ताव तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
यदि यह नीति लागू होती है तो भारतीय क्रिकेट में यह एक बड़ा बदलाव माना जाएगा. इससे खिलाड़ियों के लिए संन्यास और विदेशी लीगों में भागीदारी से जुड़े फैसले अधिक जटिल हो सकते हैं. वहीं बीसीसीआई का मानना है कि इससे भारतीय क्रिकेट संरचना और आईपीएल की प्रतिष्ठा को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी.
फिलहाल क्रिकेट जगत की निगाहें बीसीसीआई के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं. आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि प्रस्तावित ‘कूलिंग-ऑफ पीरियड’ नियम किस स्वरूप में लागू किया जाता है और इसका भारतीय क्रिकेटरों के भविष्य पर क्या प्रभाव पड़ता है.
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