बेंगलुरु की IT कंपनियों को DK शिवकुमार की चेतावनी, कन्नड़ भाषियों को नौकरी में नजरअंदाज किया तो होगी कार्रवाई

बेंगलुरु की IT कंपनियों को DK शिवकुमार की चेतावनी, कन्नड़ भाषियों को नौकरी में नजरअंदाज किया तो होगी कार्रवाई

प्रेषित समय :19:27:34 PM / Sun, Oct 25th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

बेंगलुरु. कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बेंगलुरु की आईटी कंपनियों को स्थानीय कन्नड़ भाषी उम्मीदवारों के साथ कथित भेदभाव को लेकर चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि यदि कोई कंपनी जानबूझकर कन्नड़ भाषी उम्मीदवारों को नौकरी के अवसरों से वंचित करती पाई गई, तो राज्य सरकार उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है.

रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए शिवकुमार ने कहा कि सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि कर्नाटक में कन्नड़ भाषी लोगों के अधिकारों, सम्मान और रोजगार के अवसरों की अनदेखी नहीं होने दी जाएगी.

स्थानीय उम्मीदवारों के साथ भेदभाव पर सरकार की नजर

डीके शिवकुमार ने बेंगलुरु को वैश्विक प्रौद्योगिकी केंद्र बताते हुए कहा कि राज्य को अपने स्थानीय कार्यबल की प्रतिभा और क्षमताओं पर गर्व है. उन्होंने कहा कि यदि किसी कंपनी की ओर से जानबूझकर कन्नड़ भाषी उम्मीदवारों के साथ भेदभाव किए जाने की पुष्टि होती है, तो सरकार इस मामले में कदम उठा सकती है.

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार स्थानीय लोगों की चिंताओं को दूर करने और उनके हितों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है.

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद उठा मुद्दा

यह बयान ऐसे समय आया है, जब सोशल मीडिया पर एक युवती का वीडियो वायरल हो रहा है. वीडियो में युवती ने आरोप लगाया है कि बेंगलुरु की कुछ आईटी कंपनियां भर्ती के दौरान कन्नड़ भाषी उम्मीदवारों की तुलना में तेलुगु और तमिल बोलने वाले अभ्यर्थियों को प्राथमिकता देती हैं.

युवती का दावा है कि जिन उम्मीदवारों के रिज्यूमे में कन्नड़ भाषा का उल्लेख होता है, उन्हें कथित तौर पर नौकरी के लिए चयनित नहीं किया जाता. हालांकि, ये आरोप सोशल मीडिया पर सामने आए हैं और उपलब्ध जानकारी के आधार पर इनके स्वतंत्र रूप से सत्यापित होने की पुष्टि नहीं होती है.

रोजगार में समान अवसर को लेकर चर्चा

इस मामले ने बेंगलुरु के आईटी क्षेत्र में स्थानीय भाषा, भर्ती प्रक्रिया और रोजगार के समान अवसरों को लेकर चर्चा तेज कर दी है. राज्य सरकार की ओर से चेतावनी दिए जाने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मामले की जांच किस तरह आगे बढ़ती है और कथित भेदभाव के संबंध में कोई ठोस प्रमाण सामने आते हैं या नहीं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-