नई दिल्ली. भारतीय बाजार को सस्ते विदेशी माल का डंपिंग ग्राउंड बनने से रोकने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. भारत ने चीन से आयात होने वाले टाइटेनियम डाइऑक्साइड पर फिर से 5 साल के लिए एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगा दी है. सरकार के इस फैसले से घरेलू कंपनियों को फायदा होगा.
डायरेक्टर जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज की एक जांच में सामने आया था कि चीन की कंपनियां भारत में टाइटेनियम डाइऑक्साइड को उत्पादन लागत से भी कम कीमत पर बेच रही हैं. इस वजह से भारत के स्थानीय उत्पादकों को भारी नुकसान हो रहा है. चीन से आने वाले माल पर यह शुल्क उत्पादक और उसकी श्रेणी के आधार पर तय किया गया है, जो 460 डॉलर से लेकर 681 डॉलर प्रति मीट्रिक टन तक होगा.
टाइटेनियम डाइऑक्साइड एक सफेद पिगमेंट है, जिसका यूज पेंट, कोटिंग्स, प्लास्टिक और कई अन्य उत्पादों को बनाने में होता है. चीन से सस्ते आयात पर लगाम लगने से पेंट और प्लास्टिक निर्माण से जुड़ी कंपनियों की इनपुट कॉस्ट बढ़ सकती है. हालांकि, बाजार में खुदरा कीमतें बढ़ेंगी या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां इस बढ़ी हुई लागत को खुद वहन करती हैं या उसका बोझ ग्राहकों पर डालती हैं.
कोर्ट पहुंच गया था मामला
रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम इंडियन पेंट एसोसिएशन द्वारा मई 2025 में लगाए गए पुराने शुल्क को कानूनी चुनौती दिए जाने के बाद उठाया गया है. कलकत्ता हाई कोर्ट ने अधिकारियों को इस मामले पर नए सिरे से विचार करने का आदेश दिया था. इसके बाद डीजीटीआर ने विस्तृत जांच की और स्थानीय उद्योगों के अस्तित्व को बचाने के लिए नए सिरे से संशोधित एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने की सिफारिश की. इस सिफारिश को मानते हुए सरकार ने अब एंटी डंपिंग ड्यूटी दोबारा लगा दी है.
चीन से आने वाले माल पर यह शुल्क उत्पादक और उसकी संबंधित श्रेणी के आधार पर तय किया गया है, जो 460 डॉलर से लेकर 681 डॉलर प्रति मीट्रिक टन तक होगा. अधिसूचना के अनुसार, एलबी ग्रुप सहित कुछ निर्धारित और सूचीबद्ध उत्पादकों पर 460 डॉलर प्रति टन की दर से शुल्क लागू होगा. वहीं, गैर-नमूना सहकारी उत्पादकों की सूची में शामिल कंपनियों पर 510 डॉलर प्रति टन, जबकि शेडोंग जिनहाई और शेडोंग शियानघाई जैसी कंपनियों पर 563 डॉलर प्रति टन शुल्क निर्धारित किया गया है.
इसके अलावा, अनहुई गोल्ड स्टार टाइटेनियम डाइऑक्साइड ग्रुप पर 609 डॉलर प्रति टन और अन्य सभी चीनी उत्पादकों या उन मामलों में जहां आयातक वैध इनवॉइस और निर्माता की पहचान से जुड़े जरूरी दस्तावेज पेश करने में असमर्थ रहते हैं, पर 681 डॉलर प्रति टन की दर से शुल्क लगेगा. यह पूरा शुल्क अगले 5 वर्षों तक भारतीय करेंसी में ही वसूला जाएगा

