Bihar MLC Result: शिक्षक सीटों पर बड़ा उलटफेर, 30 साल बाद हारे नवल किशोर यादव; जानें किसे कहां मिली जीत

Bihar MLC Result: शिक्षक सीटों पर बड़ा उलटफेर, 30 साल बाद हारे नवल किशोर यादव; जानें किसे कहां मिली जीत

प्रेषित समय :16:52:37 PM / Wed, Oct 28th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

बिहार. बिहार विधान परिषद की शिक्षक निर्वाचन सीटों के चुनाव परिणामों में इस बार कई पुराने चेहरों को हार का सामना करना पड़ा. चारों शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मौजूदा विधान पार्षद अपनी सीट नहीं बचा सके. इन नतीजों ने राज्य की राजनीतिक चर्चाओं को नया मोड़ दिया है. अलग-अलग सीटों पर विभिन्न दलों और एक निर्दलीय उम्मीदवार की जीत से मुकाबला किसी एक पार्टी के पक्ष में एकतरफा नहीं रहा.

पटना सीट पर नवल किशोर यादव की हार चर्चा में

पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का परिणाम सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहा. भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता नवल किशोर यादव को राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार डॉ. संजीव कुमार ने पराजित किया. उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के अनुसार, डॉ. संजीव कुमार ने 1,057 वोटों के अंतर से जीत हासिल की.

नवल किशोर यादव लंबे समय से इस सीट का प्रतिनिधित्व करते रहे थे. ऐसे में उनकी हार को भाजपा के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक झटके के तौर पर देखा जा रहा है. इस परिणाम ने शिक्षक मतदाताओं के रुझान और स्थानीय चुनावी समीकरणों पर भी सवाल खड़े किए हैं.

चार सीटों पर अलग-अलग उम्मीदवारों का दबदबा

चुनाव परिणामों में चारों सीटों पर अलग-अलग राजनीतिक समीकरण देखने को मिले. उपलब्ध जानकारी के अनुसार:

  • पटना: राजद के डॉ. संजीव कुमार ने भाजपा के नवल किशोर यादव को 1,057 मतों से हराया.

  • तिरहुत: भाजपा के नरेंद्र सिंह ने लगभग 600 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की.

  • सारण: निर्दलीय प्रत्याशी राहुल राज ने 1,815 वोटों के अंतर से जीत हासिल की. वह भाजपा के बागी उम्मीदवार के रूप में मैदान में थे.

  • दरभंगा: जन सुराज के सुरेश प्रसाद राय ने जीत दर्ज की.

इन परिणामों से स्पष्ट है कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं ने अलग-अलग उम्मीदवारों को समर्थन दिया. हालांकि, चुनाव के नतीजों का व्यापक राजनीतिक प्रभाव आगे की परिस्थितियों और दलों की रणनीति पर निर्भर करेगा.

भाजपा और अन्य दलों के लिए क्या हैं संकेत?

पटना में भाजपा के अनुभवी उम्मीदवार की हार पार्टी के लिए अहम संदेश मानी जा रही है. दूसरी ओर, तिरहुत में भाजपा की जीत ने पार्टी को राहत दी, जबकि सारण में निर्दलीय उम्मीदवार और दरभंगा में जन सुराज की सफलता ने मुकाबले को बहुकोणीय बना दिया.

शिक्षक निर्वाचन सीटों के ये नतीजे बताते हैं कि स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पकड़ और मतदाताओं की प्राथमिकताएं चुनावी परिणामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-