बैलेंसिंग रॉक के संरक्षण की मांग हाई कोर्ट पहुंची, जमीन का मालिकाना हक सरकार के नाम दर्ज कराने की गुहार

बैलेंसिंग रॉक के संरक्षण की मांग हाई कोर्ट पहुंची, जमीन का मालिकाना हक सरकार के नाम दर्ज कराने की गुहार

प्रेषित समय :18:41:47 PM / Wed, Oct 28th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नगर प्रतिनिधि ,जबलपुर. संस्कारधानी जबलपुर की विशिष्ट प्राकृतिक पहचान बैलेंसिंग रॉक के संरक्षण और उससे जुड़ी जमीन के स्वामित्व का मामला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट पहुंच गया है. मदनमहल की पहाड़ियों पर स्थित इस अनोखी चट्टान को संरक्षित विरासत स्थल के रूप में विकसित करने तथा संबंधित भूमि का मालिकाना हक राज्य सरकार के नाम दर्ज कराने की मांग को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है. याचिका में इस प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाने और इसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का आग्रह किया गया है. मामले पर अगले सप्ताह सुनवाई संभावित है.

मदनमहल किले के पास स्थित है अनोखी प्राकृतिक संरचना

नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की ओर से दायर जनहित याचिका में बताया गया है कि बैलेंसिंग रॉक मदनमहल किले से लगभग 400 मीटर की दूरी पर स्थित है. अपनी विशिष्ट भूवैज्ञानिक संरचना के कारण यह चट्टान जबलपुर की पहचान बन चुकी है. प्राकृतिक रूप से एक चट्टान का दूसरी चट्टान के ऊपर संतुलित दिखाई देना इसे खास बनाता है. यह संरचना स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है.

याचिकाकर्ता का कहना है कि ऐसी विशिष्ट प्राकृतिक संरचनाओं का संरक्षण जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखा जा सके. इसके लिए संबंधित भूमि के स्वामित्व की स्थिति स्पष्ट करने और संरक्षण की ठोस व्यवस्था बनाने की मांग की गई है.

केंद्र और राज्य सरकार सहित पांच पक्षकार बनाए

जनहित याचिका में केंद्र सरकार, मध्य प्रदेश शासन, जबलपुर के जिला कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पक्षकार बनाया गया है. याचिका के माध्यम से संबंधित अधिकारियों से प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया गया है.

मंच की ओर से अधिवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने बताया कि बैलेंसिंग रॉक की विशिष्ट भूवैज्ञानिक पहचान को देखते हुए इसके संरक्षण की जरूरत है. इसके साथ ही संबंधित जमीन का स्वामित्व राज्य सरकार के नाम दर्ज कराने की मांग भी उठाई गई है, ताकि भविष्य में इसके संरक्षण और प्रबंधन को लेकर स्पष्ट व्यवस्था बनाई जा सके.

महाबलिपुरम की कृष्णा बटरबाल का दिया उदाहरण

याचिकाकर्ता ने तमिलनाडु के महाबलिपुरम स्थित प्रसिद्ध प्राकृतिक चट्टान कृष्णा बटरबाल का उदाहरण प्रस्तुत किया है. इस प्राकृतिक संरचना को विशिष्ट भूवैज्ञानिक विरासत के रूप में पहचान मिली है. इसी तरह जबलपुर की बैलेंसिंग रॉक को भी संरक्षित करने और उसकी विशिष्टता को व्यापक स्तर पर पहचान दिलाने की मांग की गई है.

याचिका में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की सूची तथा यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में इसे शामिल करने की दिशा में प्रयास करने का आग्रह किया गया है. इसके अलावा भू-विरासत स्थलों और भू-अवशेषों के संरक्षण से जुड़े कानूनी प्रावधानों के तहत उचित कार्रवाई की मांग भी उठाई गई है.

संरक्षण से पर्यटन और प्राकृतिक विरासत को मिलेगा बढ़ावा

बैलेंसिंग रॉक का संरक्षण होने से जबलपुर की प्राकृतिक और भूवैज्ञानिक विरासत को सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है. साथ ही, इसे व्यवस्थित तरीके से विकसित किए जाने पर शहर के पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है. हालांकि, इसके लिए संबंधित भूमि के स्वामित्व, संरक्षण की जिम्मेदारी और लागू कानूनी प्रावधानों पर स्पष्ट निर्णय जरूरी होगा.

अब इस जनहित याचिका पर हाई कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर नजर रहेगी. याचिका में उठाए गए मुद्दों पर न्यायालय का रुख यह तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है कि इस प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण के लिए आगे किस तरह की कार्रवाई की जाएगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-