नगर प्रतिनिधि,जबलपुर. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में प्रभारी प्राचार्यों की पदस्थापना और वरिष्ठता से जुड़े विवाद में महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं. न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने संबंधित प्राध्यापकों के लिए कॉमन ओपन काउंसलिंग आयोजित करने की व्यवस्था निर्धारित करते हुए राज्य शासन की रिट अपीलों का निराकरण कर दिया.
कनिष्ठ प्राध्यापकों की नियुक्ति को दी गई थी चुनौती
मामला पांच अगस्त 2024 को जारी शासन की नीति के तहत पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में प्रभारी प्राचार्यों की नियुक्ति से जुड़ा है. इसमें वरिष्ठता को लेकर विवाद सामने आया था. प्रोफेसर डॉ. यशवंत कुमार मिश्रा ने रतलाम स्थित शासकीय कला एवं विज्ञान स्नातकोत्तर महाविद्यालय में डॉ. वस्तोष्पति शास्त्री की प्रभारी प्राचार्य के रूप में नियुक्ति को चुनौती दी थी.
इस मामले में चार सितंबर 2025 को हाई कोर्ट की एकलपीठ ने संबंधित प्राध्यापकों को अधिक विकल्प देने अथवा कॉमन काउंसलिंग कराने के निर्देश दिए थे. इसके खिलाफ राज्य शासन सहित संबंधित पक्षों ने रिट अपील दायर की थी.
पसंद का कॉलेज नहीं मिलने पर मिलेंगे वैकल्पिक विकल्प
युगलपीठ के निर्देशानुसार, प्रभारी प्राचार्य बनने के इच्छुक संबंधित प्राध्यापकों के लिए कॉमन ओपन काउंसलिंग आयोजित की जाएगी. यदि किसी प्राध्यापक को उसकी पसंद का महाविद्यालय नहीं मिलता है, तो वह दो अन्य शासकीय महाविद्यालयों का विकल्प दे सकेगा. इसके अलावा, संबंधित प्राध्यापक अपने वर्तमान महाविद्यालय में बने रहने का विकल्प भी चुन सकता है.
वरिष्ठता के आधार पर होगा विचार
वर्तमान महाविद्यालय में बने रहने वाले प्राध्यापक को इस बात पर आपत्ति नहीं होगी कि संबंधित पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में उससे कनिष्ठ प्राध्यापक प्रभारी प्राचार्य के पद पर कार्यरत रहे. वहीं, नियमित शासकीय महाविद्यालय में पदस्थ किए जाने की स्थिति में संबंधित प्राध्यापक की वरिष्ठता के आधार पर प्रभारी प्राचार्य पद के लिए विचार किया जाएगा.
हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद अब राज्य शासन को निर्धारित व्यवस्था के अनुसार आगे की पदस्थापना प्रक्रिया पूरी करनी होगी. इस फैसले से प्रभारी प्राचार्यों की नियुक्ति और वरिष्ठता को लेकर चल रहे विवाद के समाधान के लिए काउंसलिंग आधारित प्रक्रिया का रास्ता स्पष्ट हुआ है.
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