नई दिल्ली. दिवाली और धनतेरस से पहले सोने की कीमतों में गिरावट ने खरीदारों और निवेशकों का ध्यान खींचा है. इस साल रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद सोना अपने शिखर से करीब 25 फीसदी तक नीचे आ चुका है. इसी बीच बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) के अनुमान ने बाजार में नई चर्चा शुरू कर दी है. बैंक के मुताबिक, सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमत घटकर 3,700 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है. हालांकि, यह एक अनुमान है, निश्चित भविष्यवाणी नहीं.
29 अक्टूबर 2026 को उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने के भाव में गिरावट दर्ज की गई. रिपोर्ट में कीमत 1,42,968 रुपये प्रति 10 ग्राम बताई गई है. वहीं, इस साल 29 जनवरी को सोना 1,93,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा था. इस तुलना में मौजूदा भाव रिकॉर्ड ऊंचाई से लगभग 50,000 रुपये कम है.
रिकॉर्ड हाई से करीब 50 हजार रुपये सस्ता हुआ सोना
सोने की कीमतों में आई गिरावट ने बाजार की दिशा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. जनवरी में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद अब कीमतों में बड़ी नरमी देखने को मिल रही है.
अगर सोने को दोबारा 1.93 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंचना है, तो मौजूदा भाव से करीब 35 फीसदी की बढ़ोतरी की जरूरत होगी. हालांकि, वायदा बाजार की कीमतों और खुदरा बाजार में मिलने वाले सोने के भाव में अंतर हो सकता है. स्थानीय कीमतें शुद्धता, जीएसटी, मेकिंग चार्ज और अन्य लागतों से भी प्रभावित होती हैं.
बैंक ऑफ अमेरिका ने क्यों जताई और गिरावट की आशंका?
बैंक ऑफ अमेरिका के अनुमान के मुताबिक, सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमत 3,700 डॉलर प्रति औंस तक गिर सकती है. रिपोर्ट में इस स्तर को भारतीय मुद्रा में करीब 1.12 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के बराबर बताया गया है. वास्तविक भारतीय कीमत डॉलर-रुपये की विनिमय दर और अन्य बाजार लागतों पर निर्भर करेगी.
बैंक के तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, सोने के लिए 4,697 डॉलर प्रति औंस का स्तर महत्वपूर्ण है. इसके ऊपर मजबूती से निकलने तक कीमतों में गिरावट का जोखिम बना रह सकता है. वहीं, 4,472 डॉलर के आसपास 50-सप्ताह के मूविंग एवरेज को भी अहम स्तर बताया गया है.
ध्यान देने वाली बात है कि ये बाजार विश्लेषण और अनुमान हैं. सोने की वास्तविक कीमत कई आर्थिक और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के आधार पर बदल सकती है.
अमेरिकी ब्याज दरें और डॉलर तय करेंगे सोने की दिशा
सोने की कीमतों पर मुख्य रूप से अमेरिकी ब्याज दरों, डॉलर की मजबूती, महंगाई और बॉन्ड यील्ड का असर पड़ता है.
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ब्याज दरें: ब्याज दरें ऊंची रहने पर बिना ब्याज मिलने वाली संपत्ति के रूप में सोने की आकर्षकता कम हो सकती है.
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डॉलर की चाल: डॉलर मजबूत होने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने पर दबाव पड़ सकता है.
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महंगाई: महंगाई बढ़ने पर सोने की सुरक्षित निवेश के रूप में मांग बढ़ सकती है, लेकिन ऊंची ब्याज दरें इस प्रभाव को कम कर सकती हैं.
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भू-राजनीतिक तनाव: अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ने पर निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे सोने को समर्थन मिल सकता है.
इसलिए केवल एक कारक के आधार पर सोने की अगली चाल का अनुमान लगाना मुश्किल है.
ज्वैलरी खरीदने वालों के लिए क्या है मौका?
सोने की कीमतों में गिरावट से धनतेरस और दिवाली पर खरीदारी करने वाले ग्राहकों को राहत मिल सकती है. हालांकि, आभूषण खरीदने से पहले स्थानीय बाजार में 22 कैरेट और 24 कैरेट सोने के भाव, जीएसटी और मेकिंग चार्ज की तुलना करना जरूरी है.
निवेशकों के लिए स्थिति थोड़ी अलग है. ऊंचे भाव पर खरीदारी करने वालों को मौजूदा गिरावट में नुकसान हो सकता है. वहीं, कम कीमतों को देखकर जल्दबाजी में निवेश करना भी जोखिम भरा हो सकता है.
सोने में केंद्रीय बैंकों और गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) के निवेशकों की मांग कीमतों को समर्थन दे सकती है. दूसरी ओर, अमेरिकी ब्याज दरों और डॉलर में मजबूती से कीमतों पर दबाव बना रह सकता है.
क्या दिवाली तक फिर महंगा होगा सोना?
दिवाली तक सोने की कीमतें बढ़ेंगी या गिरेंगी, इसका निश्चित अनुमान लगाना संभव नहीं है. बैंक ऑफ अमेरिका का 3,700 डॉलर प्रति औंस का अनुमान संभावित गिरावट की ओर संकेत करता है, लेकिन बाजार की दिशा आर्थिक आंकड़ों और निवेशकों की मांग पर निर्भर करेगी.
खरीदारों के लिए बेहतर होगा कि वे केवल कीमतों में गिरावट देखकर निर्णय न लें, बल्कि अपनी जरूरत, बजट और निवेश अवधि को ध्यान में रखें. निवेश के उद्देश्य से सोना खरीदने वालों को बाजार में उतार-चढ़ाव और संभावित नुकसान का आकलन करके ही फैसला करना चाहिए.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

