राष्ट्रपति भवन में मेजर नव्या शेखावत ने संभाली अहम जिम्मेदारी, भारतीय सेना की पहली महिला अधिकारी बनीं राष्ट्रपति की ADC

राष्ट्रपति भवन में मेजर नव्या शेखावत ने संभाली अहम जिम्मेदारी, भारतीय सेना की पहली महिला अधिकारी बनीं राष्ट्रपति की ADC

प्रेषित समय :21:44:40 PM / Fri, Oct 30th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

राजस्थान के सीकर जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के करीब महत्वपूर्ण जिम्मेदारी तक पहुंचने का सफर आसान नहीं होता. इसके लिए प्रतिभा, अनुशासन, कठिन प्रशिक्षण और लगातार बेहतर प्रदर्शन की जरूरत होती है. मेजर नव्या शेखावत ने अपनी मेहनत और सैन्य सेवा के दम पर ऐसा ही मुकाम हासिल किया है. वह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की एड-डी-कैंप (ADC) के रूप में जिम्मेदारी संभाल रही हैं. इस नियुक्ति के साथ वह भारतीय सेना की पहली महिला अधिकारी बन गई हैं, जिन्हें राष्ट्रपति की ADC के रूप में यह दायित्व मिला है. उनकी उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और बदलती भूमिका का भी महत्वपूर्ण उदाहरण है.

अब राष्ट्रपति की ADC के रूप में निभा रहीं जिम्मेदारी

मेजर नव्या शेखावत की नियुक्ति सितंबर 2026 में चर्चा में आई थी. अब वह राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति की ADC के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं. इस पद पर पहुंचने वाली वह भारतीय सेना की पहली महिला अधिकारी हैं. हालांकि, राष्ट्रपति की ADC बनने वाली वह पहली महिला सैन्य अधिकारी नहीं हैं. उनसे पहले वर्ष 2025 में भारतीय नौसेना की लेफ्टिनेंट कमांडर यशस्वी सोलंकी यह उपलब्धि हासिल कर चुकी हैं. इस तरह नव्या इस प्रतिष्ठित जिम्मेदारी तक पहुंचने वाली दूसरी महिला अधिकारी हैं.

राष्ट्रपति की ADC की भूमिका को केवल औपचारिक समारोहों में साथ चलने तक सीमित नहीं समझना चाहिए. इस पद पर नियुक्त अधिकारी राष्ट्रपति के आधिकारिक कार्यक्रमों, सैन्य समारोहों और प्रोटोकॉल से जुड़ी व्यवस्थाओं में सहयोग करते हैं. उन्हें कार्यक्रमों के समन्वय, सैन्य परंपराओं के अनुरूप व्यवस्थाओं और महत्वपूर्ण आधिकारिक गतिविधियों के सुचारु संचालन में भूमिका निभानी होती है.

सीकर के केरपुरा गांव से जुड़ी हैं नव्या

मेजर नव्या शेखावत मूल रूप से राजस्थान के सीकर जिले के खंडेला क्षेत्र के गांव केरपुरा की रहने वाली हैं. उनकी सफलता की कहानी की एक खास बात यह भी है कि उनका परिवार सैन्य पृष्ठभूमि से जुड़ा रहा है. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उनके दादा सेवानिवृत्त विंग कमांडर भंवर सिंह शेखावत भारतीय वायुसेना में सेवाएं दे चुके हैं, जबकि उनके पिता भी वायुसेना में ग्रुप कैप्टन हैं. इस तरह नव्या अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी की सैन्य अधिकारी हैं.

बचपन से सैन्य माहौल और अनुशासन को करीब से देखने का अनुभव उनके व्यक्तित्व के विकास में सहायक रहा. हालांकि, सेना में अधिकारी बनने के लिए उन्हें अपनी योग्यता और मेहनत के आधार पर चयन प्रक्रिया से गुजरना पड़ा. परिवार की पृष्ठभूमि प्रेरणा जरूर बनी, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने का रास्ता उन्होंने अपनी तैयारी और प्रदर्शन से तय किया.

CDS परीक्षा में हासिल की सातवीं रैंक

नव्या शेखावत का सेना में प्रवेश संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज यानी CDS परीक्षा के माध्यम से हुआ. उन्होंने CDS-1, 2020 परीक्षा में सफलता हासिल की और ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA), चेन्नई के शॉर्ट सर्विस कमीशन महिला नॉन-टेक्निकल कोर्स के लिए चयनित हुईं.

मीडिया में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, उन्होंने CDS परीक्षा में महिला वर्ग में देशभर में सातवीं रैंक हासिल की थी. राजस्थान में वह महिला अभ्यर्थियों में पहले स्थान पर रही थीं. यह उपलब्धि उनके सैन्य करियर की मजबूत शुरुआत साबित हुई.

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CDS परीक्षा के माध्यम से सेना में अधिकारी बनने की इच्छा रखने वाले युवाओं को लिखित परीक्षा के साथ-साथ आगे की चयन प्रक्रिया के लिए भी तैयार रहना पड़ता है. इसमें मानसिक क्षमता, नेतृत्व कौशल, निर्णय लेने की योग्यता और व्यक्तित्व का आकलन किया जाता है.

OTA चेन्नई में प्रशिक्षण के बाद 2021 में सेना में कमीशन

CDS में चयन के बाद नव्या ने चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी में सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त किया. OTA में प्रशिक्षण के दौरान अभ्यर्थियों को शारीरिक दक्षता, सैन्य अनुशासन, नेतृत्व, टीम भावना और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करने के लिए तैयार किया जाता है.

प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वर्ष 2021 में नव्या शेखावत भारतीय सेना में कमीशन हुईं. उन्हें आर्मी सर्विस कॉर्प्स (ASC) में नियुक्ति मिली. यह सेना की महत्वपूर्ण शाखा है, जो सैन्य इकाइयों को रसद और आवश्यक आपूर्ति उपलब्ध कराने जैसे कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. इसमें परिवहन सहायता, राशन और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति जैसी जिम्मेदारियां शामिल हैं.

सेना में अधिकारी के रूप में नियुक्ति के बाद उन्होंने अपनी सेवा जारी रखी और लगभग पांच वर्षों के भीतर मेजर के पद तक पहुंचीं. इसके बाद राष्ट्रपति की ADC के रूप में उनकी नियुक्ति ने उनके करियर को एक नई पहचान दी.

क्या होता है राष्ट्रपति का ADC

ADC का पूरा नाम Aide-de-Camp है. यह एक सैन्य अधिकारी होता है, जिसे राष्ट्रपति जैसे उच्च संवैधानिक पदाधिकारी के आधिकारिक कार्यों में सहायता के लिए नियुक्त किया जाता है. राष्ट्रपति के ADC आधिकारिक कार्यक्रमों, सैन्य समारोहों, राजकीय आयोजनों और प्रोटोकॉल संबंधी गतिविधियों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

राष्ट्रपति भारत के सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर भी हैं. इसलिए राष्ट्रपति के सैन्य कार्यक्रमों और औपचारिक आयोजनों में सैन्य परंपराओं तथा प्रोटोकॉल का विशेष महत्व होता है. ADC इन व्यवस्थाओं के सुचारु संचालन में सहयोग करते हैं. उनकी जिम्मेदारी में सतर्कता, समय प्रबंधन, अनुशासन और उच्च स्तर की पेशेवर दक्षता जरूरी होती है.

राष्ट्रपति के साथ तैनात होते हैं तीनों सेनाओं के अधिकारी

राष्ट्रपति की ADC व्यवस्था में भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना के अधिकारियों को प्रतिनिधित्व दिया जाता है. सामान्य व्यवस्था के अनुसार राष्ट्रपति के साथ पांच ADC होते हैं. इनमें तीन अधिकारी थल सेना से, एक नौसेना से और एक वायुसेना से होते हैं.

यह व्यवस्था तीनों सेनाओं के बीच समन्वय और संयुक्त सैन्य पहचान को भी प्रदर्शित करती है. राष्ट्रपति के आधिकारिक कार्यक्रमों में सैन्य प्रोटोकॉल के अनुरूप सहयोग देना इन अधिकारियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है.

यशस्वी सोलंकी के बाद नव्या ने बनाया नया कीर्तिमान

महिला अधिकारियों के लिए राष्ट्रपति की ADC की भूमिका में पहुंचने का रास्ता वर्ष 2025 में भारतीय नौसेना की लेफ्टिनेंट कमांडर यशस्वी सोलंकी की नियुक्ति के साथ खुला था. वह राष्ट्रपति की ADC बनने वाली पहली महिला सैन्य अधिकारी बनी थीं. इसके बाद मेजर नव्या शेखावत की नियुक्ति ने भारतीय सेना में भी यह नया अध्याय जोड़ दिया.

इस बदलाव का महत्व इसलिए भी है कि भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की भूमिका लगातार व्यापक हो रही है. अब महिला अधिकारी विभिन्न सैन्य शाखाओं और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में अपनी योग्यता साबित कर रही हैं. राष्ट्रपति भवन जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में ADC की भूमिका निभाना इस बदलते परिदृश्य को सामने लाता है.

युवाओं के लिए क्या है नव्या की कहानी का संदेश

मेजर नव्या शेखावत की यात्रा उन युवाओं के लिए प्रेरक है, जो सेना में अधिकारी बनने का सपना देखते हैं. CDS जैसी प्रतियोगी परीक्षा से शुरुआत, OTA में कठिन प्रशिक्षण, सेना में नियुक्ति और फिर राष्ट्रपति की ADC जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी तक पहुंचना बताता है कि सैन्य करियर में निरंतर प्रदर्शन और अनुशासन का कितना महत्व है.

सेना में अधिकारी बनने की तैयारी कर रहे युवाओं को शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा के अनुसार UPSC की आधिकारिक अधिसूचनाओं पर ध्यान देना चाहिए. CDS परीक्षा के साथ एसएसबी चयन प्रक्रिया, शारीरिक फिटनेस और व्यक्तित्व विकास की तैयारी भी जरूरी है.

नव्या की उपलब्धि का संदेश साफ है कि अवसर मिलने पर महिलाएं भी सैन्य सेवा की प्रतिष्ठित जिम्मेदारियों को पूरी क्षमता के साथ निभा सकती हैं. सीकर के केरपुरा गांव से राष्ट्रपति भवन तक पहुंची उनकी यात्रा आज उन बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो देश की सेवा को अपना लक्ष्य बनाना चाहती हैं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-